FEATUREDHealth

Alert Report : दूध के बैक्टीरिया खराब कर रहे हैं किडनी, लीवर और फेफड़े

हेल्थ डेस्क। दूध को स्वास्थ्यवर्धक पेय है पर इसमें खतरनाक बैक्टीरिया पनप जाए तो यही दूध आपकी किडनी, लीवर या फेफड़ों को बिगाड़ भी सकता है। भारतीय पशु चिकित्सा अनुंसधान संस्थान के वैज्ञानिकों को बरेली के दूधियों, गांवों और दूसरे सैंपल में स्यूडोमोनास नाम का बैक्टीरिया मिला है।

गाय-भैंसों के दूध में स्यूडोमोनास बैक्टीरिया का पता लगाने के लिए आईवीआरआई के महामारी विभाग के अध्यक्ष डॉ. भोजराज सिंह और एमवीएससी की छात्रा डॉ. हिमानी अग्री ने सैंपल इकट्ठा किए। बरेली में घर-घर दूध देने वाले दूधियों, सेंट्रल जेल की डेयरी, आईवीआरआई में इलाज के लिए आने वाले बीमार गाय-भैंस और चार गांवों- मुझैना जागी, सिमरा, धौरेरा और गरेन से गाय-भैंसों के दूध के 305 सैंपल इकट्ठा कर इनकी प्रयोगशाला में जांच की गई।

इनमें से 31 सैंपल में स्यूडोमोनास बैक्टीरिया मिले, इनमें से ज्यादातर भैंसों के दूध में मिले थे। आईवीआरआई में इलाज के लिए आए गाय-भैंसों के 60 सैंपल की जांच हुई, इसमें से 21 में नुकसानदायक बैक्टीरिया मिले हैं। वैज्ञानिकों ने कहा कि यह बैक्टीरिया दूषित पानी में मिलता है। दूधियों से लिए गए सैंपल में भी स्यूडोमोनास मिला है और इससे साफ है कि दूध में दूषित पानी की मिलावट की गई। डॉ. भोजराज ने कहा कि दूध में यह बैक्टीरिया मिले तो साफ हो जाता है कि पानी में मिलावट की गई है।

सुपरबग और एस्केप श्रेणी के स्यूडोमोनास भी मिले

सैंपल की जांच में सुपरबग क्वालीफिकेशन के स्यूडोमोनास मिले। डॉ. भोजराज सिंह ने कहा कि यह बैक्टीरिया काफी हठी होता है। उसपर से एंटीबायोटिक प्रतिरोधी क्षमता विकसित कर ले तो और भी खतरनाक हो जाता है। कुछ बैक्टीरिया एस्केप ग्रुप थे। एस्केप ग्रुप उन बैक्टीरिया को कहते हैं जो हास्पिटल में लगते हैं और इनसे पीछा छुड़ाना काफी मुश्किल होता है।

सेप्टीसीमिया और अंगों में संक्रमण फैला सकता है

डॉ. भोजराज सिंह ने बताया कि स्यूडोमोनास सेप्टीसीमीया, लेग इनफेक्शन के साथ ही अंदरूनी अंगों में भी संक्रमण कर सकता है। यह किडनी, लीवर और फेफड़ों में संक्रमण का कारण बन सकता है। स्थिति तब और खतरनाक हो सकती है जब संक्रमण फैलाने वाला बैक्टीरिया सुपरबग क्वालीफिकेशन हो। ऐसी स्थिति में नए जमाने की कार्बापेनम ग्रुप एंटीबायोटिक भी इन पर बेअसर हो जाएगी।

सेंट्रल जेल डेयरी का दूध सर्वोत्तम

सेंट्रल जेल बरेली की डेयरी से भी सैंपल लिए गए थे। इसमें खतरनाक बैक्टीरिया नहीं मिले। डॉ. भोजराज सिंह ने कहा कि सेंट्रल जेल बरेली की डेयरी का दूध सबसे अच्छा है। इसका एक कारण यह भी है कि वहां पर गायों की संख्या अधिक है। स्यूडोमोनास ज्यादातर भैंसों के दूध में मिले है। या तो वे गंदे पानी में नहाती हैं या फिर उनकी थन को गंदे पानी से धोया जाता है।

दूध में स्यूडोमोनास का मिलना यह दर्शाता है कि दूध में दूषित पानी की मिलावट की गई है। यह बैक्टीरिया खतरनाक है और जितने सैंपल में बैक्टीरिया मिले हैं उसमें 25 प्रतिशत मामले सुपरबग क्वालीफिकेशन के थे। दूध को सही तरीके से उबाल कर पीए, जानवर बीमार है तो उसका दूध न पीएं। डॉ. भोजराज सिंह, प्रधान वैज्ञानिक सह विभागाध्यक्ष
महामारी विभाग, आईवीआरआई, बरेली

दूषित पानी मिलाने से संक्रमण की संभावना

सुडोमोनाज बैक्टीरिया गंदे पानी, मिट्टी में पाया जाता है। संभव है दूध में दूषित पानी मिलाने से बैक्टीरिया आ गया है। जिनके शरीर में रोग प्रतिरोधक प्रणाली कमजोर होती है, उनके शरीर के किसी भी अंग को यह प्रभावित कर सकता है। एसजीपीजीआई के माइक्रोबायोलोजी विभाग की प्रमुख प्रो. उज्जवला घोषाल के मुताबिक यह बैक्टीरिया फेफड़ा, पेट, त्वचा सहित किसी भी अंग को प्रभावित कर सकता है। रक्त प्रवाह में जाकर यह गंभीर संक्रमण का कारण हो सकता है। ब्रुसेलोसिस बैक्टीरिया जानवरों के शरीर पर ही पाया जाता है। इस लिए सफाई से दूध न निकालने पर जानवर से ही दूध में आ जाता है। यह भी घातक साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि पाश्चुराइज दूध ही इस्तेमाल करना चाहिए।

स्यूडोमोनास बैक्टीरिया शरीर में किसी भी तरह का संक्रमण फैला सकता है। इससे रक्त में संक्रमण के अलावा, पेशाब और शरीर के किसी भी हिस्से में संक्रमण हो सकता है। इससे व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार हो सकता है। स्यूडोमोनास बैक्टीरिया इतने खतरनाक हैं कि यह एंटीबायोटिक दवाइयों के प्रतिरोधी हो चले हैं। -प्रोफेसर नवल विक्रम, मेडिसन विभाग, एम्स

Leave a Reply

Back to top button