वक्फ बिल पर अजीत पवार का रहस्यमयी रुख, लोकसभा में वोटिंग के बाद भी उनकी चुप्पी ने बढ़ाई राजनीतिक उत्सुकता

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वक्फ बिल पर अजीत पवार का रहस्यमयी रुख, लोकसभा में वोटिंग के बाद भी उनकी चुप्पी ने बढ़ाई राजनीतिक उत्सुकता। वक्फ बोर्ड संशोधन विधेयक, 2024 लोकसभा से पास हो चुका है. बुधवार को निचले सदन में हुई वोटिंग में 288 सांसदों ने बिल के पक्ष में तो 232 सांसदों ने विरोध में वोट किया. हालांकि वोटिंग के बाद भी एनडीए की सहयोगी एनसीपी (अजीत पवार गुट) का रुख सामने नहीं आया. उसके सांसद सुनील तटकरे ने पार्टी की भूमिका बताए बिना ही मतदान किया. इससे वक्फ संशोधन विधेयक पर उसके रुख पर सस्पेंस बना हुआ है।

वक्फ बिल पर अजीत पवार का रहस्यमयी रुख, लोकसभा में वोटिंग के बाद भी उनकी चुप्पी ने बढ़ाई राजनीतिक उत्सुकता

जब सभी पार्टियों को लोकसभा में अपनी बात रखने का मौका मिला, तो अजीत पवार की पार्टी ने अपनी राय क्यों नहीं रखी? यह सवाल अब उठने लगा है. एनसीपी को विधानसभा चुनाव में मुस्लिम वोटर्स ने बड़ी संख्या में वोट किया था. हसन मुशरिफ, सबा मालिक ये वो मुस्लिम नेता हैं जो एनसीपी के टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं।

एनसीपी जता चुकी हैं चिंता

एनसीपी इससे पहले बिल पर चिंता चुकी है. एनसीपी प्रमुख अजीत पवार ने कहा था कि उनकी पार्टी मुसलमानों के साथ कोई अन्याय नहीं होने देगी. पवार ने कहा था एनसीपी ने फैसला किया है कि अगर आपको (मुसलमानों को) इस विधेयक के बारे में कोई चिंता है, तो हम आपकी चिंताओं को सुनेंगे. हम अल्पसंख्यकों के साथ कोई अन्याय नहीं होने देंगे. उन्होंने कहा कि हमारे तीन सांसद हैं और ये हमारा वादा कि हम मुसलमानों के साथ कोई अन्याय नहीं होने देंगे।

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10 घंटे से अधिक की चर्चा के बाद बिल पास

लोकसभा में बुधवार को बिल पर करीब 13 घंटे चर्चा हुई. बहस के बाद देर रात करीब दो बजे विधेयक को पारित किया गया जिसमें वक्फ संपत्तियों के प्रशासन और प्रबंधन में एकरुपता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का लक्ष्य है।

केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सदन में वक्फ संशोधन विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए सरकार के इस कदम को मुस्लिम विरोधी बताने के कई विपक्षी सदस्यों के दावों को खारिज करते हुए कहा कि इस विधेयक को मुसलमानों को बांटने वाला बताया जा रहा है, जबकि सरकार इसके जरिए शिया, सुन्नी समेत समुदाय के सभी वर्गों को एक साथ ला रही है।

रिजिजू के जवाब के बाद सदन ने अनेक विपक्षी सदस्यों के संशोधनों को खारिज करते हुए 232 के मुकाबले 288 मतों से वक्फ (संशोधन) विधेयक को पारित किया।