katni news today in hindi कन्या महाविद्यालय में भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ के तत्वावधान में गुरु-शिष्य संबंधों पर कार्यक्रम हुआ आयोजित
कटनी– katni news today in hindi शासकीय कन्या महाविद्यालय, कटनी के भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ द्वारा सभागार में उच्च शिक्षा विभाग, मध्य प्रदेश शासन के निर्देशानुसार जुलाई माह की गतिविधियों के अंतर्गत “गुरु-शिष्य संबंध” विषय पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व को दर्शाने वाले वृत्तचित्रों का प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. चित्रा प्रभात के मार्गदर्शन में मां सरस्वती की आराधना के साथ हुआ ।
भगवान श्रीकृष्ण और सांदीपनी ऋषि के संबंधों का उदाहरण प्रस्तुत किया
प्राचार्य डॉ. चित्रा प्रभात ने अपने उद्बोधन में गुरु-शिष्य संबंधों की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए भगवान श्रीकृष्ण और सांदीपनी ऋषि के संबंधों का उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने उपस्थित छात्राओं और स्टाफ से इस पवित्र परंपरा से प्रेरणा लेकर जीवन में आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि गुरु न केवल ज्ञान का संचार करते हैं, बल्कि शिष्य के जीवन को नैतिकता और संस्कारों से समृद्ध करते हैं।
कार्यक्रम की संयोजक डॉ. साधना जैन ने अपने वक्तव्य में गुरु की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि गुरु ही वह प्रकाश है जो शिष्य को अंधकार से बाहर निकालकर बौद्धिक, मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक विकास की ओर ले जाता है। उन्होंने गुरु-शिष्य परंपरा को भारतीय संस्कृति की आधारशिला बताया और इसके महत्व को आधुनिक संदर्भ में भी प्रासंगिक ठहराया कार्यक्रम के दौरान श्रीकृष्ण-सांदीपनी ऋषि, द्रोणाचार्य-एकलव्य, और आरुणि के जीवन से संबंधित प्रेरक वृत्तचित्रों का प्रदर्शन किया गया, जिन्होंने उपस्थित लोगों में इस परंपरा के प्रति गहरी समझ विकसित की।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. अशोक शर्मा ने किया, तथा तकनीकी सहयोग भीम बर्मन ने प्रदान किया।इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त शैक्षणिक और अशैक्षणिक स्टाफ, जिनमें डॉ. विमला मिंज, डॉ. रश्मि चतुर्वेदी, डॉ. आर.के. गुप्ता, डॉ. अमिताभ पाण्डेय, डॉ. किरण खरादी, बंदना मिश्रा, के.जे. सिन्हा, डॉ. सुनील कुमार, और डॉ. वीणा सिंह ने सक्रिय भागीदारी की। भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ के सदस्यों डॉ. के.जी. सिंह, डॉ. पी.सी. कोरी, प्रेमलाल कावरे, श्रीमती प्रियंका सोनी, और श्री विनीत सोनी ने कार्यक्रम को सफल बनाया ।कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्राओं की उपस्थिति ने इसे और भी प्रभावी बनाया। यह आयोजन भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण और प्रचार-प्रसार में महाविद्यालय के प्रयासों को दर्शाता है।








