आत्मजागृति के महापर्व हरेमाधव वर्सी पर्व में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब,सतगुरु दर्शन, सत्संग और भजन-कीर्तन से भक्तिमय हुआ माधवनगर, नि:शुल्क चिकित्सा शिविर में हजारों जरूरतमंदों को मिली सेवा

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आत्मजागृति के महापर्व हरेमाधव वर्सी पर्व में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब,सतगुरु दर्शन, सत्संग और भजन-कीर्तन से भक्तिमय हुआ माधवनगर, नि:शुल्क चिकित्सा शिविर में हजारों जरूरतमंदों को मिली सेव

कटनी -आत्मजागृति, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना के महापर्व हरेमाधव वर्सी पर्व के दूसरे दिन शनिवार को हरेमाधव धाम में श्रद्धा और समर्पण का अद्भुत नजारा देखने को मिला। सतगुरु साहिबान के पावन दर्शन और सत्संग का लाभ लेने के लिए प्रातःकाल से ही हजारों श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया। 9 अक्टूबर को पर्व में शामिल नहीं हो सके श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में धाम पहुंचे। पूरा परिसर भजन-कीर्तन, सतगुरु महिमा और हरेमाधव के जयघोष से गुंजायमान रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ “मेरे सतगुरां, हम शरण तेरी आए” अरदास के साथ हुआ। इसके बाद भजन-राग, संकीर्तन और हरेमाधव सद्ग्रंथ की पावन वाणियों का गायन किया गया। श्रद्धालु भक्ति और भाव-विभोर वातावरण में सतगुरु की महिमा का गुणगान करते रहे।
सतगुरु की दिव्य लीलाओं के दर्शन से भावविभोर हुए श्रद्धालु
कार्यक्रम के दौरान एलईडी स्क्रीन पर सतगुरु बाबा माधवशाह जी और सतगुरु बाबा नारायणशाह साहिब जी की परोपकारी एवं जीव-कल्याणकारी लीलाओं का चलचित्र प्रस्तुत किया गया। इन लीलाओं के माध्यम से सतगुरु की करुणा, कृपा और भक्तों के प्रति उनके वात्सल्य भाव को दर्शाया गया। चलचित्र ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया और उन्हें आत्मचिंतन की प्रेरणा दी।
सतगुरु की शिक्षाओं के अनुसार, मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य आत्मबोध प्राप्त करना, विकारों से मुक्त होना और भक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ना है। सतगुरु द्वारा प्रदत्त अमृत नाम का नियमित सिमरन, ध्यान, सेवा और भजन-बंदगी आत्मिक उन्नति के प्रमुख साधन हैं। सतगुरु अपने शिष्यों को उनके वास्तविक स्वरूप का बोध कराते हुए जीवन को सही दिशा प्रदान करते हैं। जिस प्रकार दर्पण में मनुष्य अपना चेहरा देखता है, उसी प्रकार सतगुरु आत्मा की पहचान कराकर जीव को उसके वास्तविक स्वरूप से परिचित कराते हैं।
सतगुरु की शरण में ही आत्मिक शांति और सच्चे सुख का मार्ग
हरेमाधव वर्सी पर्व केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मजागरण, समर्पण और रूहानी मिलन का पावन अवसर है। यह पर्व श्रद्धालुओं को स्मरण कराता है कि संसार के भौतिक वैभव से परे आत्मिक शांति और सच्चे सुख का मार्ग भक्ति, सेवा और सतगुरु से जुड़ाव में निहित है।
सतगुरु के दिव्य वचन और पावन दर्शन मन की अशांति को दूर कर अंतर्मन को शीतलता प्रदान करते हैं। उनकी शिक्षाएं प्रेम, करुणा, निष्काम सेवा और सद्भाव की भावना को प्रबल करती हैं। श्रद्धालुओं के लिए सतगुरु के सानिध्य में बैठना, उनके दर्शन करना और उनकी कृपा का अनुभव करना जीवन का अनमोल सौभाग्य है।
पर्व के दौरान यह संदेश भी दिया गया कि जिस प्रकार विद्युत तार से जुड़ने पर ही बल्ब प्रकाशमान होता है, उसी प्रकार जीवन को आध्यात्मिक प्रकाश से आलोकित करने के लिए सतगुरु से जुड़ाव आवश्यक है। नाम-सिमरन, ध्यान, सेवा और भजन-बंदगी इस जुड़ाव को सुदृढ़ करने के माध्यम हैं। परम धाम की वास्तविक भाषा शब्दों से अधिक सेवा, साधना और समर्पण में अभिव्यक्त होती है।
दो दिवसीय पर्व की प्रतीक्षा में महीनों पहले से उमड़ने लगती है श्रद्धा
9 और 10 अक्टूबर को आयोजित हरेमाधव वर्सी पर्व का श्रद्धालुओं को लंबे समय से इंतजार रहता है। अनेक संगतें महीनों पहले से ही सतगुरु के दर्शन, उनकी पावन लीलाओं के अवलोकन और उनके सानिध्य में समय बिताने की अभिलाषा लेकर इस पर्व की प्रतीक्षा करती हैं। पर्व के दोनों दिन माधवनगर में भक्ति, प्रेम, सेवा और समर्पण का वातावरण बना रहा। संगत में शामिल होकर श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक शांति और सामूहिक भक्ति का अनुभव किया।
नि:शुल्क चिकित्सा शिविर में हजारों जरूरतमंदों को मिली सेवा
हरेमाधव वर्सी पर्व के अवसर पर 9 और 10 अक्टूबर को बाबा माधवशाह चिकित्सालय में दो दिवसीय नि:शुल्क चिकित्सा शिविर भी आयोजित किया गया। शिविर में कटनी, जबलपुर, नागपुर और रायपुर से आए विशेषज्ञ चिकित्सकों ने जरूरतमंदों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कीं। इस दौरान हजारों लोगों को चिकित्सा परामर्श और उपचार का लाभ मिला। अस्पताल की ओर से नि:शुल्क दवाइयों का वितरण भी किया गया।
धार्मिक आयोजन के साथ जनसेवा को जोड़ने वाली यह पहल मानवता, करुणा और परोपकार की भावना का उदाहरण बनी। शिविर के माध्यम से जरूरतमंदों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का प्रयास किया गया।
भक्ति, सेवा और प्रेम से आलोकित रहा माधवनगर
हरेमाधव वर्सी पर्व के दोनों दिन माधवनगर श्रद्धा, आध्यात्मिक ऊर्जा और सेवाभाव से सराबोर रहा। सतगुरु दर्शन, सत्संग, भजन-कीर्तन और चिकित्सा सेवा ने आयोजन को आध्यात्मिकता के साथ सामाजिक सरोकारों से भी जोड़ा। हजारों श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह और श्रद्धाभाव के साथ पर्व का लाभ लिया।
समूचे आयोजन में सतगुरु के प्रति अटूट विश्वास, समर्पण और कृतज्ञता का भाव प्रमुखता से दिखाई दिया। श्रद्धालुओं के मन में यही भावना गूंजती रही— “सतगुरु की रहमत सदा अंग-संग।”