Saturday, April 11, 2026
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साढे सात हजार साधु-संतों ने ली कांग्रेस की सदस्यता

जबलपुर । भेड़ाघाट नर्मदा संसद में पधारे लगभग साढे सात हजार साधु संतों ने कांग्रेस की सदस्यता ली है । कंप्यूटर बाबा द्वारा आयोजित इस नर्मदा संसद में दूर दूर से आए साधु-संतों ने मां नर्मदा की अनदेखी और प्रदेश सरकार द्वारा साधु संतों की भावनाओं की भावनाओं से खिलवाड़ करने का आरोप भी लगाया इस मौके पर आचार्य प्रमोद कृष्णम भी मौजूद रहे, उनका कहना था की सत्य को परेशान किया जा सकता है, लेकिन उसे पराजित नहीं किया जा सकता। हमें इन्हें दिखाना है तुम हमारी ही दम पर थे। इसलिए ये जरूरी हो गया है इनको आईना दिखाया जाए। बीजेपी २०१४ के लोकसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत से आई। सरकार बनाने के लिए ये राम मंदिर बनाने की बात करते थे, लेकिन सरकार बनने के बाद ये राम को ही भूल गए, जो भगवान श्रीराम का नहीं, वह हमारे भी किसी काम का नहीं….

भाजपाा सरकार वादा करके भूली

कृष्णम ने कहा कि सभी संतों कांग्रेस का समर्थन करना चाहिए. लोकतंत्र में जो छोटे-छोटे कंकड़ होते हैं, वही सिर फोडऩ के काम आते हैं. कांग्रेस की सरकार आती है तो प्रत्येक गाँव में गौ शाला बनाएंगे. गौ संवर्धन करेंगे. दुर्भाग्य है कि देश में गौ रक्षा का कानून नहीं बना सका, गंगा सफाई, धारा ३७० और कॉमन सिविल कोर्ट की बात करते थे, सारे वादे वादे ही रह गए..यदि हमारी चले तो कंप्यूटर बाबा को इस देश का प्रधानमंत्री बना दें. इस अवसर पर कम्प्यूटर बाबा ने भी बीजेपी पर खुलकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि ऐसी सरकार को बाहर का रास्ता दिखाया जाना चाहिए.

नर्मदा मैया को बेचने का आरोप

नर्मदे संसद का शुभारंभ मां नर्मदा के पूजन और मंत्रोच्चार से हुआ। आचार्य नवीन ने कलश पूजन कराया। इसके बाद सभा में संतों ने कहा कि किसी की भी ज्यादा उंचाई नुकसानदेह होती है। मौजूदा सरकार भी इतनी हाइट पर पहुंच गई है कि हम सब के लिए नुकसानदायक है। संतों ने आरोप लगाते हुए कहा कि नर्मदा स्वच्छता की बात कर नर्मदा पुत्र कहलाने वाला नेता ही नर्मदा को बेचने का काम करता रहा। इसकी पोल खोलने कंप्यूटर बाबा ने यात्रा निकलने का निर्णय लिया तो मुख्यमंत्री ने सच्चाई को छुपाने का प्रया किया और कम्प्यूटर बाबा से ये कहकर राज्यमंत्री बना लिया कि नर्मदा स्वच्छता की जिम्मेदारी आप संभालेंगे, पर ऐसा नहीं करने दिया, आखिरकार बाबा ने अपना पद व उनका साथ छोड़ दिया, अब नर्मदा की रक्षा के लिए ही नर्मदे संसद का आयोजन किया है।

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम

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