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51 किलो सोने का कलश के चोरों का पता बताते वाले को मिलेगा 10 हजार का ईनाम

शिवपुरी-खनियांधाना। स्टेट काल में स्वतंत्र राजधानी रही खनियांधाना के किले में महाराजा खलकसिंह जूदेव ने राम जानकी मंदिर की स्थापना की थी। 300 साल पुराने इस मंदिर के शिखर पर 51 किलो वजनी सोने का कलश स्थापित किया गया था, जो बुधवार-गुरुवार की रात 1 से 3 बजे के बीच चोरी चले जाने से सनसनी फैल गई है। कलश चोरी जाने की सबसे पहले जानकारी नगर परिषद अध्यक्ष और खनियांधाना राज परिवार के सदस्य शैलेन्द्रप्रतापसिंह को सुबह 5 बजे लगी, जबकि समीपस्थ रहने वाले भाजपा मंडल अध्यक्ष भानु जैन ने भी 6 बजे कलश गायब देखा।

एसपी ने किया 10 हजार का इनाम घोषित –

इधर वारदात के बाद जहां पुलिस चोरों का सुराग लगाने में जुट गई हैं। वहीं शाम को एसपी राजेश हिंगणकर ने वारदात को अंजाम देने वालों पर 10 हजार रुपए का इनाम घोषित कर दिया है। आरोपियों को बंदी बनाने या बंदी बनवाने या सुराग देने वाले को यह इनाम दिया जाएगा।

इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस मौके पर पहुंची और डॉग स्क्वॉड के साथ पड़ताल शुरू की। इधर लोगों को जानकारी लगी तो वे भी मौके पर जा पहुंचे और घटना को लेकर आक्रोश बढ़ गया। लोगों ने सड़क पर उतरकर विरोध स्वरूप खनियांधाना के बाजार बंद करा दिए। हालांकि एसडीओपी पिछोर आरपी मिश्रा और खनियांधाना टीआई राकेश् शर्मा लोगों से 24 घंटे की मोहलत मांगते रहे, लेकिन जनता का क्रोध काबू के बाहर रहा।

मंदिर में पूजा करने पुजारी तो आता है, लेकिन रात को कोई नहीं रहता। पुरातत्व महकमे ने भी इसे संरक्षित नहीं किया, जबकि सुरक्षा के लिए यहां कोई इंतजाम नहीं हैं। इसके नतीजे में यह बड़ी वारदात घटित हो गई। पुलिस की गश्त पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। 51 किलो वजनी इस कलश की कीमत 14 से 15 करोड़ रुपए बताई जा रही है। चोरी की वारदात को लेकर जहां डेढ़ माह पहले हुए जीर्णोद्धार में नांदेड़ महाराष्ट्र के कारीगरों पर शंका की जा रही है, वहीं यूपी सहित अंतरराष्ट्रीय स्तर के अपराधियों के भी वारदात में शामिल होने की बात सामने आ रही है।

 

जिले के इतिहास की सबसे बड़ी चोरियों में मानी जा रही राम जानकी मंदिर से 51 किलो के कलश चोरी से पुलिस भी सन्न है। जानकारी लगते ही एफएसएल प्रभारी डॉ. एचएस बरहादिया व फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट अजय चौधरी भी अपनी टीम के साथ मौके पर साइंटिफिक एविडेंस जुटाने पहुंच गए थे। टीम को फिंगर प्रिंट व फुट प्रिंट तलाशने में काफी मशक्कत करनी पड़ी, क्योंकि वारदात की रात खनियांधाना में रात को रिमझिम बारिश हो रही थी। इसके चलते शिखर के आसपास तो प्रिंट जुटाने में सफलता नहीं मिली, लेकिन मंदिर के सामने बने बरामदे में टीम को तीन फुट प्रिंट मिले हैं।

इनमें दो व्यक्तियों के जूते के निशान हैं, जबकि एक के पंजों के यानि वारदात में संभवतः तीन लोग शामिल रहे होंगे। इनमें से एक ने जूते नहीं पहन रखे थे। इसके अलावा शिखर तक जाने वाले रास्ते की एक ईंट भी टूटी मिली है। हालांकि शिखर के ऊपरी हिस्से से बारिश के कारण प्रिंट हासिल नहीं किए जा सके। इसे लेकर ये भी कयास लगाए जा रहे हैं कि चोरों ने सीढ़ी का इस्तेमाल किया होगा। फिलहाल पुलिस इन सभी सुरागों के आधार पर जांच को केन्द्रित किए हुए हैं।

कलश था ठोस सोने का या चढ़ा था पानी, सबके पास सुनी सुनाई कहानी –

मंदिर करीब तीन शताब्दी पुराना है। तब से ही पीढ़ी दर पीढ़ी ये कहा जाता रहा है कि मंदिर पर स्थापित कलश 51 किलो सोने से निर्मित है। बताया जाता है कि इसे लेकर भी जब पुलिस ने राजपरिवार के सदस्यों से हकीकत जानने का प्रयास किया तो उनका भी यही कहना था कि पीढ़ी दर पीढ़ी उन्हें ये जानकारी मिलती रही कि कलश ठोस सोने से निर्मित है, लेकिन वास्तविक हकीकत किसी को पता नहीं है।

आखिर कैसे उतारा होगा 51 किलो वजनी कलश –

पुलिस को कई बिंदु भी जांच में हैरान कर रहे हैं। शिखर के ऊपरी हिस्से पर फिंगर प्रिंट नहीं मिले हैं। सवाल ये है कि जिस कलश को करीब 51 किलो वजन का बताया जा रहा है, उसे 50 फीट ऊंचाई से उतारना और फिर उसे ले जाना आसान काम नहीं है। फिलहाल ये भी साफ नहीं हुआ है कि चोर फोर व्हीलर से पहुंचे या फिर किसी अन्य साधन से।

नगर के बीच बाजार में स्थित है मंदिर –

राम जानकी मंदिर कस्बे के बीचों बीच स्थित है। इसके आसपास घर भी बने हुए हैं। रिहायशी इलाका होने के बावजूद चोरों ने यहां चोरी की वारदात को अंजाम दिया, जबकि पुलिस की रात्रि गश्त रहती है, लेकिन रात्रि गश्त को लेकर लोग सवाल उठा रहे हैं।

दो बार पहले भी चोरी करने का किया था प्रयास –

300 साल पुराने राम जानकी मंदिर से कलश को चुराने का प्रयास चोर दो बार पहले भी कर चुके हैं और यहां चोरों ने चोरी का प्रयास किया, लेकिन दोनों बार वे विफल रहे। चोरी की दो बार वारदात हो जाने के बाद भी यहां सुरक्षा के इंतजाम नहीं किए गए। 1983 में पुलिस ने इसी कलश को चुराने के प्रयास में कुछ लोगों को पकड़ा था, जबकि साल 2006 में चोरों ने सिलपुरा ग्राम से बिजली की लाइन काटकर पूरा खनियांधाना अंधेरे में कर दिया। रातभर बिजली गुल रही, लेकिन किसी तरह पुलिस चोरों को पकड़ने में कामयाब हो गई, जिन्होंने कबूला था कि कलश चुराने के लिए बिजली की लाइन काटी थी।

जैन प्रतिमाओं को लेकर भी निशाने पर है खनियांधाना –

खनियांधाना का गोलाकोट अतिशत क्षेत्र हमेशा से ही चोरों के निशाने पर रहा है। मूर्ति चोर यहां से जैन प्रतिमाओं को चुराने का प्रयास कर चुके हैं। कई बार चोर यहां से मूर्ति चोरी कर ले जाने में भी सफल रहे हैं।

जैन प्रतिमाओं के तोड़ दिए थे सिर –

कुछ सालों पहले गोलाकोट इलाके में रखी जैन प्रतिमाओं को खंडित कर दिया था और इनके सिर काट दिए गए थे। चोर इन सिरों को ले जाने में कामयाब नहीं हो सके और उन्होंने उन्हें कुंए में फेंक दिया था। उस समय भी जैन समाज के रोष के बाद गोलाकोट अतिशय क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ाई गई थी।

विरोध में बंद हुए बाजार –

राम जानकी मंदिर से कलश चोरी जाने की घटना के बाद जनता में आक्रोश है और जनता का कहना है कि पुलिस की गश्ती न होने के कारण 300 साल पुराना कलश मंदिर से चोरी हो गया। इसके बाद लोगों ने बाजार बंद कर दिए।

चंद्रशेखर आजाद से भी जुड़ा है खनियांधाना का इतिहास –

महाराजा खलकसिंह जूदेव का क्रांतिकारियों को सहयोग रहता था। कई क्रांतिकारी उनके संपर्क में थे। खनियांधाना का इतिहास चंद्रशेखर आजाद से जुड़ा है। चंद्रशेखर आजाद महाराजा खलकसिंह जूदेव के साथ खनियांधाना आए थे और किले में रहे और उन्होंने सीतापाठा पर बम के परीक्षण किए, जिसके निशान आज भी यहां मौजूद हैं। चंद्रशेखर आजाद की मूछों को ताव देते हुए फोटो भी यहां के पेंटर मम्माजू ने ही बनाई थी।

खलकसिंह से मित्रता के बाद रुके थे चंद्रशेखर –

खलकसिंह जूदेव अपनी कार को सही करवाने के लिए झांसी गए थे। उसी दौरान जब वह अपनी कार सही करा रहे थे, उसी दौरान एक सांप जब उनके पैर के समीप आया तो चंद्रशेखर आजाद ने अपनी पिस्टल से गोली मार दी, जिसके बाद खलकसिंह ने उनसे उनका नाम पूछा तो उन्होंने अपना नाम नहीं बताया। खलकसिंह ने कई बार पूछा तो उन्होंने अपना नाम चंद्रशेखर आजाद बताया, जिसके बाद खलकसिंह जूदेव चंद्रशेखर आजाद को अपने साथ खनियांधाना लेकर आए और यहां बम के परीक्षण किए और करीब एक माह से अधिक का समय बिताने के बाद चंद्रशेखर आजाद यहां से चले गए।

डेढ़ माह पहले नांदेड़ के कारीगरों से कराया था जीर्णोद्धार –

डेढ़ माह पहले ही नांदेड़ के कारीगरों से इस मंदिर का जीर्णोद्धार और रंग रोगन का काम कराया गया था। पुलिस को शक है कि इन्हीं में से किसी ने चोरी की वारदात को अंजाम दिया होगा और पुलिस की टीमें भी नांदेड़ भेजने की बात आला अधिकारी कह रहे हैं।

किले की दीवार का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त –

मंदिर के समीप ही बनी किले की एक दीवार का हिस्सा क्षतिग्रस्त है। बीते साल हुई बारिश के बाद यह हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसके बाद इसका निर्माण नहीं कराया गया। आशंका जताई जा रही है कि चोर इसी क्षतिग्रस्त दीवार वाले हिस्से से दाखिल हुए होंगे।

24 घंटे का अल्टीमेटम, फिर उग्र प्रदर्शन –

इधर विहिप के जिला मंत्री मनोज गुरू ने कहा है कि 24 घंटे में यदि पुलिस कलश बरामद नहीं करेगी तो समूचे खनियांधाना और पिछोर इलाके में उग्र प्रदर्शन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

ओरछा के रामराजा और यहां एक साथ लगे थे कलश –

शैलेन्द्रसिंह के पिता भानुप्रतापसिंह के मुताबिक खनियांधाना की तरह ही ओरछा स्वतंत्र रियासत थी। दोनों ही स्थान पर एक जैसे कलश एक ही दिन और समय पर स्थापित किए गए थे।

1948 में खत्म हुई थी रियासत –

खनियांधाना पूर्व में ओरछा रियासत का ही हिस्सा था, लेकिन 1724 में महाराज उदोतसिंह ने अपने बेटे अमरसिंह को इसे सौंप दिया। हालांकि 1948 में भारत के स्वतंत्र होने के बाद इस रियासत सहित 27 गांव का विलय शिवपुरी जिले व तत्कालीन मध्यभारत प्रांत में कर दिया गया।

गुंबद पर चढ़ने के लिए है जगह –

राम जानकी मंदिर के गुंबद पर चढ़ने के लिए जगह है। इसका डिजाइन इस तरह से बनाया गया था कि इस पर चढ़कर ऊपर ध्वज आदि लगाए जा सकें। चोरों ने मंदिर की रेकी कर रखी थी। उन्हें पता था कि मंदिर के गुंबद तक कैसे पहुंचा जा सकता है।

मंदिर में नहीं सीसीटीवी, दुकानों के खंगाले –

मंदिर में सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हैं, लेकिन मंदिर के आसपास की दुकानों में लगे सीसीटीवी कैमरों की पड़ताल पुलिस ने की। हालांकि पुलिस को कुछ हाथ नहीं लगा है। इधर डॉग ने किले से निकलकर ढिमरियाना मोहल्ले होते हुए तालाब तक परेड की और वापस लौट आया।

चक्काजाम करने उतरे 500 लोग –

कोशलेन्द्र प्रतापसिंह के नेतृत्व में 400 से 500 लोग सड़क पर उतरे और थाने जा पहुंचे। समीपस्थ रोड पर जाम लगाना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने आक्रोशित लोगों को समझाते हुए तीन दिन की मोहलत मांगी है। तीन दिन में सुराग न लगा तो आंदोलन होगा।

5ः50 पर फोन 7 बजे पहुंची पुलिस –

इतनी बड़ी घटना को पुलिस ने मामूली सी ढंग से लिया। यह इस बात से साबित होता है कि मंदिर के सामने रहने वाले दिनेश झा ने 5ः30 पर कलश गायब देखा तो 5ः50 पर एसडीओपी मिश्रा को जानकारी दे दी, लेकिन झा के मुताबिक पुलिस मौके पर 7 बजे आई।

शैलेन्द्र का घर 100 फीट दूरी पर –

किले के अंदर ही मंदिर है और उसी में शैलेन्द्रप्रताप सिंह सहित उनके भाई कौशलेन्द्र रहते हैं। मंदिर से शैलेन्द्र प्रताप के घर की दूरी 100 फीट, जबकि कौशलेन्द्र के घर की दूरी 60 फीट है।

पूजा कर चले जाते हैं पुजारी –

मंदिर में रात को कोई नहीं रहता, बल्कि दिन में भी पुजारी सूर्यकांत पाठक पूजा करके चले जाते हैं। लोगों के मुताबिक बीच बस्ती में स्थित मंदिर में भक्त भी दर्शन के लिए आते रहते हैं।

मंदिर से जुड़े तथ्य –

-मंदिर के समीप ही एक दीवार है और इस पर दीवार पर असानी से चढ़ सकते हैं।

-मंदिर के समीप किले की एक दीवार है और इस दीवार पर आसानी से चढ़ा जा सकता है।

-दीवार में एक गड्ढा है और उसके थोड़ा सा ऊपर एक पाट निकला हुआ है। इस पर पैर रखकर आसानी से चढ़ा जा सकता है।

-दीवार पर चढ़ने के बाद एक मोटी पुरानी पत्थरों की दीवार है, जिस पर असानी से चढ़कर मंदिर की छत तक पहुंचा जा सकता है।

-छत पर पहुंचने के बाद गुंबज पर आसानी से चढ़ा जा सकता है।

यह बोले अधिकारी –

फिलहाल जांच के बाद चोरों की तलाश शुरू कर दी गई है, जहां तक कलश की कीमत और वजन का सवाल है, अभी यह स्पष्ट नहीं है, क्योंकि इसे कई वर्षों पहले स्थापित किया गया था। बरामदगी के बाद ही इसकी कीमत और वजन सहित अन्य बिंदु साफ हो पाएंगे।

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