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पुलिस सेवा के 433 अफसरों मे से एक भी अफसर दागी नहीं!

MP Police 1

भोपाल। मध्यप्रदेश राज्य पुलिस सेवा के 433 अफसरों मे से एक भी अफसर दागी नहीं है. यह सुनकर अजीब जरूर लगेगा, लेकिन सरकारी फाइलों में कुछ ऐसा ही हुआ है. दरअसल, सरकार के 20-50 फॉर्मूले के तहत नॉन परफॉर्मेंस अफसरों को नौकरी से हटाना था. सर्विस रिकॉर्ड की पड़ताल में सभी अफसर बेदाग निकले, जबकि कई ऐसे अफसर हैं जिनके दामन पर रेप और यौन शोषण जैसे दाग हैं.

हाल ही में मंत्रालय में गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव केके सिंह की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति की बैठक हुई थी. बैठक में पुलिस महानिदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और एडीजी प्रशासन अनुराधाशंकर सिंह भी मौजूद थी. इस बैठक में पुलिस मुख्यालय द्वारा भेजे गए 433 अफसरों के नामों की सूची पर विचार किया गया. इसमें 20 वर्ष की सेवा और 50 वर्ष की आयु पूरी कर चुके अफसरों की पांच साल की सीआर देखी गई थी।

20-50 फॉर्मूले के तहत गंभीर आरोप, विभागीय जांच और कार्य में लापरवाही बरतने वाले अफसरों को नौकरी से हटना था. लेकिन बैठक में सभी को क्लीन चिट दी गई. समिति की नजर में सभी अफसर बेदाग है. ऐसा इसलिए भी हुआ, क्योंकि समिति ने इस दायरे में आने वाले ऐसे नामों को भी विचारण से हटाया, जिनकी सेवानिवृत्ति के केवल एक साल बाकी हो. साथ ही पदोन्नति पा चुके अफसरों के नाम भी इस दायर से बाहर किए गए. ऐसे में सिर्फ 2015 बैच के अफसर ही इस फॉर्मूले के दायरे में आए।

यही सबसे बड़ा कारण रहा कि फॉर्मूले के दायरे में 160 से ज्यादा ही राज्य पुलिस सेवा के अफसर आए. सूत्रों ने बताया कि समिति ने सभी अधिकारियों को पात्र बताते हुए किसी को नौकरी से बाहर नहीं किए जाने की अनुशंसा की है.

राज्य सेवा पुलिस अफसरों के बाद मध्य प्रदेश कॉडर के आईपीएस अफसरों को लेकर छानबीन समिति की बैठक इसलिए नहीं हो पा रही है क्योंकि पिछले साल हुई बैठक के कार्यवाही विवरण का अनुमोदन ही मुख्यमंत्री सचिवालय ने अब तक नहीं किया है. केन्द्रीय गृह मंत्रालय बार-बार मध्य प्रदेश से इस संबंध में जानकारी मांग रहा है।

छानबीन समिति की अनुशंसा पर इसलिए सवाल खड़े हो रहे हैं, क्योंकि हाल ही में पीएचक्यू में पदस्थ एएसपी राजेंद्र वर्मा पर यौन शोषण और डीएसपी पवन मिश्रा पर भी रेप का केस चल रहा है. ऐसे में सभी को बेदाग बताना सवालों के घेरे में है।
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