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2020 अवमानना केस: SC ने माफी मांगने के लिए प्रशांत भूषण को फिर दिया 30 मिनट का समय

उच्चतम न्यायालय में मंगलवार को प्रशांत भूषण के 2020 आपराधिक अवमानना मामले की सुनवाई की। अदालत ने न्यायपालिका के खिलाफ ट्वीट पर खेद व्यक्त नहीं करने के अपने रुख पर ‘विचार करने’ के लिए अवमानना के लिए दोषी ठहराए गए कार्यकर्ता-वकील प्रशांत भूषण को 30 मिनट का समय दिया।
सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा, ‘इंसान को अपनी गलती का एहसास होना चाहिए, हमने भूषण को समय दिया, लेकिन उनका कहना है कि वह माफी नहीं मांगेंगे। प्रशांत भूषण को बोलने की स्वतंत्रता है, लेकिन उनका कहना है कि वह अवमानना के लिए माफी नहीं मांगेंगे।’
वहीं अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने न्यायालय से कहा कि अवमानना के लिए दोषी ठहराए गए वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण को माफी दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि अदालत को भूषण को चेतावनी देनी चाहिए और दयापूर्ण रुख अपनाना चाहिए।
न्यायालय ने कहा कि अदालत केवल अपने आदेश के जरिए अपनी बात रख सकती है। अपने हलफनामे में भी प्रशांत भूषण ने अपमानजनक टिप्पणी की है।
शीर्ष अदालत की पीठ ने अटॉर्नी जनरल से पूछा, ‘प्रशांत भूषण ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ध्वस्त हो गया है, क्या यह आपत्तिजनक नहीं है।’ इसपर अटॉर्नी जनरल ने कहा, ‘प्रशांत भूषण खेद व्यक्त करेंगे।’
10 सितंबर को एक अन्य पीठ करेगी 209 मामले की सुनवाई
इससे पहले मंगलवार को 2009 में वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण द्वारा न्यायाधीशों पर टिप्पणी से जुड़े अवमानना मामले में उच्चतम न्यायालय ने मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) एसए बोबडे से अनुरोध किया कि इसे अदालत की उपयुक्त पीठ के समक्ष रखा जाए। अदालत ने इस मामले को 10 सितंबर को एक अन्य पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया है।
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