11 साल से कार्यरत अतिथि विद्वानों की सेवाएं समाप्त करने की तैयारी
जबलपुर। पिछले 10 साल से जो अध्यापक शिक्षा का दीप कॉलेज में जला रहे थे उन्हें अब मुश्किल दौर में अलविदा कहा जा रहा है।
शिक्षकों ने मुख्य सचिव उच्च शिक्षा से इस मामले में दखल की मांग की है। मामला शासकीय महाकोशल कॉलेज का है जहां स्ववित्तीय मद के अंतर्गत सत्र 2009 से कार्यरत अतिथि विद्वानों की सेवाएं समाप्त की जा रही हैं।
शिक्षकों का कहना है कि कॉलेज प्राचार्य से जब वेतन की मांग की तो उन्होंने आगामी सत्र प्रारंभ होने तक वेतन भुगतान नहीं होने की बात कही। ऐसे में उन्होंने सेवाएं समाप्त करने की बात कही।
शिक्षकों के अनुसार कोविड-19 की महामारी में हर कोई आर्थिक संकट से जूझ रहा है ऐसे में दूसरा कोई कार्य भी मिलना मुमकिन नहीं होगा।
कई परिवार संकट में आ जाएंगे। चिट्ठी लिखने वालों में डॉ.आभा दुबे, डॉ.रंजना शर्मा, अंकिता शेट्टी, केपाली समैया, श्रद्धा अग्रवाल, सुशील ठाकरे, सौरभ राय, मनीष गुजराती आदि शामिल रहे।
वहीं कुछ अतिथि शिक्षकों को उच्च शिक्षा विभाग ने दी थी राहत, मार्च-अप्रैल के बाद से वेतन का कर रहे थे इंतजार।
सरकारी कॉलेजों में पदस्थ अतिथि विद्वानों को लॉकडाउन में वेतन भुगतान को लेकर असमंजस था, जिसे विभाग ने खत्म कर दिया था, पिछले दो माह से वेतन का इंतजार कर रहे विद्वानों को मई और जून का भी वेतन भुगतान किया जाएगा।
इस संबंध में शासन ने निर्देश जारी कर दिए थे। जल्द ही वेतन एक मुश्त 30 हजार रुपये मासिक के हिसाब से दिया जाएगा। उक्त राशि 20 दिन के कार्य दिवस के मुताबिक दी जा रही है।
दरअसल लॉकडाउन के बीच रिक्त पदों के विरुद्घ पदस्थ अतिथि विद्वानों को वेतन भुगतान पर निर्देश नहीं मिले थे। इस वजह से कॉलेजों ने भी वेतन भुगतान नहीं किया। कई अतिथि विद्वानों को इस दौरान पैसा नहीं मिलने से आर्थिक मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
बमुश्किल अब उच्च शिक्षा विभाग ने सभी कॉलेजों को मई-जून माह का वेतन भुगतान करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद अतिथि विद्वानों ने भी राहत ली है। इन सभी को 20 दिन के कार्य दिवस के हिसाब से भुगतान करने को कहा गया है।
इधर महाकोशल कॉलेज की प्राचार्य डॉ.आभा पांडे ने बताया थूकि अतिथि विद्वानों को 30 हजार रुपये एक मुश्त राशि का भुगतान किया जाता है। आवंटन शासन की तरफ से मिलते ही भुगतान किया जाएगा।