स्लीमनाबाद पर उत्तराखंड के जोशीमठ बनने का खतरा मंडरा रहा है। दरअसल नर्मदा दायीं तट नहर की टनल के ऊपर की मिट्टी के अचानक धंसकने से लोगो में दहशत है। लोगों ने बताया कि यहां अपने आप सिंक होल बन रहे हैं। लोग पलायन करने पर मजबूर हो रहे। पढ़िए यशभारत.कॉम से विवेक शुक्ला की यह रिपोर्ट
स्लीमनाबाद के उत्तराखंड के जोशीमठ बनने का खतरा मंडराने लगा है। यहां नर्मदा दायीं तट नहर में स्लीमनाबाद के नीचे से बनाई जा रही टनल के ऊपर की मिट्टी के अचानक धंसकने से लोगों में जोशीमठ की तरह दहशत बढऩे लगी है। एक दिन पहले बस्ती से करीब 100 मीटर की दूरी पर लगभग 15 फीट गोलाई की मिट्टी अचानक जमीन के भीतर समा गयी। जिससे यहां पर कुआं जैसा भारी भरकम गड्ढा हो गया।
घुघरी रोड के किनारे खाईनुमा गड्ढा
यही स्थिति बसाहट के पास एक सप्ताह पहले भी बनी थी, जब घुघरी रोड के किनारे खाईनुमा गड्ढा हो गया था। लगातार होते गड्ढों को लेकर स्लीमनाबाद के दर्जनों ऐसे परिवार सुरक्षा को लेकर दहशतजदा हैं। जिनके घरों के नीचे से टनल गुजरी है। उन्हें डर सताने लगा है कि उनके घर भी कहीं अनहोनी का शिकार न हो जाएं। अभी भी करीब तीन दर्जन घर, मकान और दुकानों के नीचे से होकर टनल गुजरना है। साल भर पहले उत्तराखंड के जोशीमठ में टनल के कारण हुई तबाही को याद कर लोग डरे हुए है।
लोगो को आशंका है कि कही स्लीमनाबाद का हाल भी जोशीमठ जैसा ना हो। अब तक सिंकहोल टीबीएम मशीन चलने के दौरान 10 मीटर आगे या पीछे होते थे। जिसे अधिकारी बोरिंग के दौरान स्वाभाविक होना बता कर पल्ला झाड़ लेते थे और जन धन हानि की गुंजाइश भी कम थी क्योंकि वहां सुरक्षा घेरा होता था लेकिन अभी हुए सिंकहोल में चिंताजनक पहलू यह है कि जिस जगह यह घटित हुआ वहां टनल बने करीब डेढ़ से दो साल का समय गुजर चुका है।
घरों के नीचे से टनल
घरों के नीचे से टनल बनने के बाद परिवार सहित रहने वाले विजय काछी, अश्वनी चौबे, वीरेंद्र चौबे, प्रेमवती तिवारी, कढ़ोरी माली, सविनय तिवारी सहित तीन दर्जन परिवार हैं जो सिंकहोल की घटना के बाद घर छोडऩे का मन बनाने लगे हैं। जिनका कहना है कि हमारे सामने समस्या यह है कि घर छोडक़र कहां जाए। टनल गुजरने से घरों की दीवारों में दरारें है। इनको डर है कि अगर घरों के नीचे मिट्टी धसकी तो क्या होगा। इससे अच्छा नर्मदा घाटी विभाग हमारे मकानों के अधिग्रहण कर मुआवजा दे दे तो हम लोग कहीं भी परिवार सहित सुरक्षित तो रह लेंगे।
ग्राउंड ग्रॉउटिंग पर उठ रहे सवाल
टनल निर्माण के दौरान करीब एक दर्जन सिंकहोल होने की घटनाओं को रोकने और परिसम्पत्तियों की सुरक्षा के नाम पर एनवीडीए ने ग्राउंड ग्रॉउटिंग का जिम्मा ठेका कंपनी से हटकर अलग से इंदौर की एक कंपनी को सौपा था। जिस पर करोड़ों रुपये का ठेका लेने के बाद लोकल तौर पर गुणवत्ताहीन और बोगस ग्रॉउटिंग करने के गंभीर आरोप लगे थे। लोकल और अनुभवहीन नॉन टेक्निकल कर्मचारियों से काम कराया गया था। अब बोगस ग्रॉउटिंग के दुष्परिणाम भी दिखने लगे हैं। जब सालभर बाद सिंकहोल बन रहे हैं। जिससे लोग चिंता में डूबे हैं।
जियोलॉजिकल सर्वे को लिखा पत्र
एनवीडीए के ईई सहज श्रीवास्तव का कहना है कि टनल निर्माण के दौरान जिन स्थानों पर सिंकहोल हुए थे, वहां मिट्टी फिलिंग की गई थी। बारिश के कारण उन्हीं प्वाइंटों पर फिर से मिट्टी धंसी है। इसे रोकने के लिए जियोलॉजिकल सर्वे विभाग को पत्र लिखा गया है। सर्वे टीम की रिपोर्ट के आधार पर और बेहतर ट्रीटमेंट दिया जाएगा।
