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सावन सोमवार विशेष: 300 साल पुराने इस शिव मंदिर के नीचे मिलते हैं तालाब

रायपुर । सरोना गांव में लगभग 300 साल पुराना प्रसिद्ध शिव मंदिर है। यह मंदिर दो तालाबों के बीच स्थित है। मंदिर के नीचे से तालाब आपस में जुड़े हुए हैं। इस तालाब में दो कछुए आज भी दिखाई देते हैं। माना जाता है कि मंदिर निर्माण के समय से ही कछुवे रह रहे हैं। कछुओं को देखने के लिए भक्त घंटों तालाब किनारे बैठे रहते हैं।

शिव मंदिर गांव के ठाकुर परिवार ने बनवाया था। तब से ठाकुर परिवार के सदस्य ही मंदिर की देखभाल करते हैं। कहा जाता है कि ठाकुर परिवार ने संतान प्राप्ति की कामना की थी। कामना पूरी होने के बाद मंदिर का निर्माण करवाया। उसी समय से यह मान्यता चली आ रही है कि संतान प्राप्ति के लिए सरोना स्थित शिव मंदिर में जल अर्पण, पूजा करने से मनोकामना पूरी होती है।
शिव प्रतिमा पर नाग फन फैलाए

जिस तरह क्षीर सागर में भगवान विष्णु के सिर पर नागों फन फैलाए दिखाई देते हैं, उसी तरह यहां भगवान शंकर की प्रतिमा के सिर पर नाग ने पांच फन फैलाए हैं। भगवान शंकर की गोद में गणेशजी सो रहे हैं। ऐसी प्रतिमा कहीं और नहीं है। पंचमुखी शिवलिंग के बगल में भक्त क्रीत मुख देव का सिर स्थापित है। शिवलिंग के साथ भक्त की पूजा भी की जाती है।

ये है मान्यता 

14 गांव के मालिक स्व.गुलाब सिंह ठाकुर को संतान नहीं थी, जूनागढ़ अखाड़े से आए नागा साधु ने तालाब खुदवाने व शिव मंदिर बनाने का आदेश दिया। इसके बाद ठाकुर को दो पुत्र प्राप्त हुए। मान्यता है कि सच्चे दिल से पूजा करने से संतान की प्राप्ति होती है।

मंदिर में सुबह से लेकर शाम तक जलाभिषेक करने की व्यवस्था की गई है। दिनभर भजन-कीर्तन किया जाएगा। यहां आसपास के गांवों से सोमवार को कांवरिये आते हैं, उनके लिए जलाभिषेक की विशेष व्यवस्था है।

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