सागर के खुरई में खुलेगा कृषि महाविद्यालय और नये कृषि विज्ञान केन्द्रों को हरी झंडी, लाभान्वित होंगे छात्र- छात्राएं
जबलपुर। रहली और छिंदवाड़ा जिले में उद्यानिकीय महाविद्यालय की भी स्थापना की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। इसके अलावा सिंगरौली में बने नये कृषि विज्ञान केन्द्र की स्थापना होने के बाद कार्य प्रारंभ हो गया है और सागर व छिंदवाड़ा जिले में एक एक नये कृषि विज्ञान केन्द्र की स्थापना नये वित्तीय वर्ष में होने की स्वीकृति भी प्राप्त हो गयी है।
अभी तक जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के सिंगरौली सहित 20 कृषि विकास केन्द्र थे और अब छिंदवाड़ा और सागर में दो नये केन्द्र और खुलने से इनकी संख्या बढ़कर 22 हो जाएगी। इसके अलाव सागर जिले के खुरई में एक कृषि महाविद्यालय की स्थापना का मार्ग भी प्रशस्त हो चुका है।
कृषि शिक्षा के विस्तार और अनुसंधान को गंभीरता से लेते हुए सूत्रों से जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक आने वाले समय में दो और कृषि महाविद्यालय खुल सकते हैं। वर्ष 2008 में जब जवाहरलाल नेहरु कृषि विश्वविद्यालय का विभाजन हुआ तो पांच कॉलेज ग्वालियर विश्वविद्यालय के हिस्से में चले गये थे जिससे कर्मचारियों को काफी पीड़ा हुई।
लेकिन इसके अलावा आधा वित्तीय भार भी ग्वालियर विश्वविद्यालय को सौंप दिया गया था जबकि पेंशन के मामले जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के जिम्मे ही रहने दिये। वर्तमान में जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत जबलपुर में कृषि इंजीनियरिंग कॉलेज सहित रीवा, टीकमगढ़, बारासिवनी (बालाघाट), पवारखेड़ा में कृषि महाविद्यालय हैं।
यदि नये कृषि विश्वविद्यालय जिनकी स्वीकृति मिल चुकी है तो जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय एक बार फिर अपूर्णता से पूर्णता को प्राप्त कर लेगा। क्योंकि पूर्व में जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत दस महाविद्यालय आते थे जो विभाजन के बाद घटकर पांच रह गये थे। नये कृषि विश्वविद्यालय और केवीके खुलने से न केवल कृषि शिक्षा का विस्तार होगा बल्कि छात्रों को लाभ भी मिलेगा। इसके अलावा कृषि क्षेत्र में रोजगार के बढ़ते अवसरों का फायदा भी कृषि महाविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र उठा सकेंगे।








