Wednesday, May 27, 2026
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शहरवासी भी लुट रहे ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के नाम वाले फर्जी फॉर्म से

कटनी । महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना के नाम पर व्यापक स्तर पर चल रहे फर्जीवाड़े की समस्या से कटनी जिला भी  जूझ रहा है। दरअसल, लाखों लोगों को केंद्र सरकार के कार्यक्रम ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के फर्जी ऐप्लिकेशन फॉर्म बेच दिए गए हैं। मंत्रालय को इस साल करीब 30 लाख फर्जी फॉर्म मिले हैं। धोखाधड़ी कर रहे लोगों ने गरीबों को यह वादा कर फॉर्म बेचा है कि अगर उनकी कोई बेटी है तो महज फॉर्म भरने से वे 2 लाख रुपये पाने के हकदार हो जाएंगे। जबकि इस योजना में सरकार ने ऐसे किसी प्रोत्साहन का जिक्र नहीं किया है।

मंत्रालय को अधिकांश फॉर्म यूपी से मिले हैं, जबकि अक्टूबर-नवंबर में हिमाचल से ऐसे फॉर्म आने की संख्या में बड़ी वृद्धि देखी गई है। ऐसे फॉर्म बड़ी संख्या में पंजाब से भी प्राप्त हुए हैं।d3a6ae85 7fce 4d21 a369 b9f095895950

बताया गया कि दिल्ली के सीजेओ कॉम्प्लेक्स स्थित मंत्रालय का गोदाम फर्जी फॉर्म से भर गया है। सरकार ने अलग-अलग माध्यमों में चलाए अभियान में कहा है कि ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना में ऐसे किसी प्रोत्साहन का जिक्र नहीं है।

उधर मंत्रालय के मुताबिक, धोखाधड़ी करने वालों ने ऐसे फॉर्म 20 से 50 रुपये में बेचे हैं। गरीबों से कहा गया है कि अगर वे यह फॉर्म भर देंगे तो 2 लाख रुपये पाने के हकदार हो जाएंगे। उन्होंने इस फॉर्म पर अपनी निजी जानकारियां जैसे- फोटो, बैंक और आधार की डीटेल भी साझा की हैं। यह समस्या मंत्रालय के सामने इतनी बड़ी बनकर आई है कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने विधि, गृह और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालयों के साथ पिछले महीने ही बैठक की है ताकि इससे निपटने के तरीके निकाले जा सकें।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने सभी फॉर्म को बिना नोटिस दिए नष्ट करने का फैसला किया है। साथ ही लोगों के बीच जागरूकता फैलाने का निर्णय लिया गया है ताकि उन्हें बताया जा सके कि योजना के तहत किसी को भी व्यक्तिगत लाभ नहीं दिया जा रहा और न ही खाते में सीधा पैसा भेजा जा रहा है। मंत्रालय ने मामले की जांच की जिम्मेदारी सीबीआई को भी सौंपी है। अधिकांश फॉर्म स्पीड पोस्ट के जरिए आए हैं इसलिए मंत्रालय ने राज्यों के पोस्टमास्टरों को समस्या से अवगत कराया है। मीडिया कैम्पेन के तहत भी मंत्रालय बता रही है कि लोग ऐसे धोखेबाजों की बातों में न आएं।

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम

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