वेबसाइट हैक होने के बाद कटनी नगर निगम के पोर्टल का डोमिन भी एक्सपायर

कटनी। प्रदेश सरकार द्वारा सभी नगरीय निकायों के लिए शुरू की गई ई नगर पालिका पोर्टल सेवा के उपयोग में जबलपुर पूरे प्रदेश में पहले पायदान पर पहुंच गया है। जबलपुर में इस पोर्टल के माध्यम से 5 हजार फाइलों का निराकरण किया है। छिंदवाड़ा दूसरे स्थान पर है, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि कटनी का तो इस सूची में कहीं नाम ही नहीं है।
किसी भी जिम्मेदार को नहीं लगी एक्सपायरी की भनक, प्रदेश का एकमात्र नगर निगम कटनी जिसका नहीं है ऑनलाइन पोर्टल
आपको जानकर हैरानी होगी कि जहां केंद्र सरकार नागरिक सुविधाओं को ऑन लाइन करने के लिये तमाम प्रयत्न में जुटी है, वहीं कटनी नगर निगम के पास आज की तारीख में कोई ऑनलाइन पोर्टल तक नहीं है। नगर निगम की वेबसाइट हैक होने के बाद तो इसका डोमिन नेम केएमसी कटनी डाट काम भी एक्सपायर हो गया है। इसे रिन्यू कराने की चिंता तक किसी अधिकारी या फिर नगर निगम को नहीं है। जानकारी के मुताबिक यह डोमिन नेम 14 नवंबर को एक्सपायर हो चुका है।
इसे कटनी शहर का ही दुर्भाग्य कहें कि प्रदेश के नगर निगमों को कटनी शहर दिखाने के लिए प्रदेश भर के महापौरों को कटनी में इकट्ठा किया गया था, लेकिन आज जब उन्हें जब यह पता लगेगा कि कटनी नगर निगम का अपना पोर्टल का नाम तक एक्सपायर हो चुका है तो वह निश्चित तौर पर माथा पकड़ लेंगे। प्रदेश भर के नगर निगमों में अब कई काम आनलाइन जबलपुर अव्वल कटनी का नाम तक नहीं प्रदेश के नगर निगम में अब कोई भी काम सीधे नहीं हो रहा है।
चाहे वह फाइलों का निराकरण हो या फिर किसी भी प्रकार का भुगतान। इसके लिए सरकार ने एक अप्रैल 2017 से ई-नगर पालिका पोर्टल शुरू किया हैए, ताकि सेंट्रलाइज मॉनीटरिंग की जा सके। इस व्यवस्था को पटरी में आने में ही करीब 3 से 4 माह का समय लग गया, लेकिन उसके बाद जबलपुर ने जब रफ्तार पकड़ी तो सभी को पीछे छोड़ दिया है। जबलपुर नगर निगम 8 माह की अवधि में ही ई पोर्टल के माध्यम से 5 हजार 329 फाइलों को निपटा चुका है। जिनके माध्यम से 129 करोड़ रुपए के भुगतान भी हो चुके हैं। इसमें कर्मचारियों के वेतन से लेकर ठेकेदारों के भुगतान तक सभी प्रकार के मामले हैं।
क्या है ई पोर्टल प्रक्रिया
नगर निगम में अब कोई भी फाइल का निराकरण सीधे नहीं होता है। फाइल का ऑडिट होने के बाद उसे ई पोर्टल में चढ़ाया जा रहा है। इसके बाद ही भुगतान हो रहे हैं। इसके अलावा कर्मचारियों का वेतन, पेंशन और अन्य भुगतान भी इसी पोर्टल के माध्यम से हो रहे हैं।दूसरे नंबर पर छिंदवाड़ा
ई-नगर पालिका पोर्टल के उपयोग में जबलपुर के बाद दूसरे नंबर पर छिंदवाड़ा है जिसने अभी तक 2 हजार 411 फाइल इसके माध्यम से निबटाई है। वहीं भोपाल और इंदौर का आंकड़ा अभी एक हजार पर भी नहीं पहुंच पाया है जबकि सभी को इस पोर्टल के माध्यम से ही भुगतान करना है।
क्यों नहीं हैं कटनी की इसमें रूचि
इस मामले में जब कटनी नगर निगम के बारे में सोचा गया तो तथ्य सामने आया कि आखिर कटनी नगर निगम को आन लाइन बनने में रूचि क्यों नहीं है? दरअसल कटनी नगर निगम में भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा पार है । अनेक अधिकारी कर्मचारी वर्षों से जमे हैं। कई अधिकारियों के राजनीतिक संबंध इनका बाल भी बांका नहीं कर पा रहे। अगर कई नागरिक सेवाएं आनलाइन हो जाएंगी तो इन अधिकारियों कर्मचारियों की की तवज्जो भी कम हो जाएगी। नागरिक सेवाओं के लिए इन कर्मचारी अधिकारियों को भ्रष्टाचार करने का मौका नहीं मिलेगा जिसके चलते जानबूझकर इस पर अनदेखी की जा रही है।
कमिश्रर की रूचि नहीं,डोमिन एक्सपायरी की जानकारी तक नहीं
आनलाइन सेवाओं के विस्तार में नगर निगम कमिश्रर संजय जैन की कोई रूचि नहीं हैं। नगर निगम कटनी की वेबसाइट हैक होने के घंटों बाद तक किसी को कानो-कान खबर तक नहीं लगी और जब यशभारत ने सबसे पहले इस पर ध्यानआक्रष्ट कराया तो कमिश्रर ने बेहद बेबाकी से कहा कि निगम की वेबसाइट रोज अपडेट होती है और अपडेटेशन के दौरान की हेकिंग की जानकारी लगी, जबकि सच्च्चाई यह है कि कमिश्रर या फिर उनके मातहत कभी भी नगर निगम का पोर्टल ओपन तक नहीं करते क्योंकि अगर वह ऐसा करते तो अब तक उन्हे जानकारी लग जाती कि कटनी नगर निगम का केएमसीकटनी नाम से बुक डोमिन ही एक्सपायर हो चुका है। इस बारे में जब कमिश्रर से जानकारी लेने की कोशिश की गई तो उनका मैसेज आया कि वह मीटिंग में हैं। देखा जाए तो नगर निगम में सिर्फ मीटिंग या फिर यूं कहें कि चीटिंग ही हो रही है धरातल पर कुछ भी नहीं।
आनलाइन इन सेवाओं का घर बैठे उपयोग
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पेड़ काटने या लगाने की अनुमति
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