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रेलवे के वाहन स्टेंड में गाड़ी रखना हुआ मंहगा, जीेएसटी भी चुकाना होगा

जबलपुर. रेलवे के वाहन स्टेंड में वाहन रखना महंगा हो गया है. पश्चिम मध्य रेल प्रशासन ने जबलपुर के 1 नंबर प्लेटफार्म के बाहर (सदर ओर) का जो नया ठेका दिया है, उसमें उसने ठेकेदार को दोगुना वसूली का अधिकार दे दिया है. खास बात यह है कि रेल कर्मचारियों के लिए भी यह राशि बढ़ा दी गई है. साथ ही इस किराये के अलावा 18 प्रतिशत जीएसटी भी वाहन स्वामियों से वसूली जायेगी. रेल कर्मचारियों के वाहनों पर शुल्क दोगुना किये जाने का विरोध शुरू हो गया है. वेस्ट सेंट्रल रेलवे एम्पलाइज यूनियन ने इस बढ़ोत्तरी का विरोध करते हुए मामले को उच्च स्तर पर उठाने का निर्णय लिया है.

पमरे प्रशासन ने 1 जनवरी 2019 से जबलपुर के प्लेटफार्म नंबर 1 के बाहर की ओर का वाहन स्टेंड का नया ठेका दिया है, उस ठेके में रेल प्रशासन ने दो गुना से लेकर चार गुना अधिक रेट बढ़ाने की मंजूरी दे दी है. सबसे अधिक दर रेल कर्मचारियों जो कि उसी स्टेशन पर कार्यरत हैं, के लिए मंथली बढ़ाई गई है, पहले उन्हें 50 रुपए लगता था, जो अब सीधे 200 रुपए कर दिया गया है, इस राशि में 18 प्रतिशत जीएसटी अलग से भुगतान करना होगा. यूनियन ने जताया विरोध रेल कर्मचारियों के लिए वाहन स्टेंड शुल्क में चार गुना से ज्यादा की वृद्धि से कर्मचारी में आक्रोश बढ़ गया है.

खासकर रेलवे के रनिंग स्टाफ जो ट्रेन संचालन से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं, वे अपना वाहन स्टेंड पर खड़ा कर ट्रेन लेकर जाते हैं, उन्हें अब 50 रुपए की बजाय सीधे 200 रुपए तो देना ही होगा, साथ ही इसमें 36 रुपए जीएसटी का भी लगेगा. इस व्यवस्था पर पमरे एम्पलाइज यूनियन के मंडल सचिव नवीन लिटोरिया व मंडल अध्यक्ष बीएन शुक्ला ने विरोध जताते हुए कहा है कि एक साथ 4 गुना से ज्यादा दर रेल कर्मचारियों के लिए बढ़ाना उचित नहीं है, इस राशि को कम किया जाना चाहिए, वे इस मामले को उच्च अधिकारियों के समक्ष उठायेंगे और मांग करेंगे कि रनिंग स्टाफ के लिए अलग से वाहन स्टेंड की व्यवस्था करें, ताकि वे वहां पर अपना वाहन सुरक्षित व कम शुल्क पर रख सकें.

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम

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