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रेजर व वनकर्मी बने ठेकेदार, कर रहे मजदूरों का शोषण

शाहनगर, पन्ना। लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिले और उन्हें अपने श्रम के बदले उचित पारिश्रमिक मिले इसी मंशा के साथ शासन द्वारा कई योजनायें तो चलाईं ही जातीं हैं साथ ही शासन द्वारा श्रमिकों की अलग-अलग श्रेणियों के लिए अलग-अलग मजूदरी भुगतान की दरें भी निर्धारित की गईं हैं। इसके बावजूद भी सरकारी विभाग ही इन मानकों के विपरीत जाकर श्रमिकों का शोषण कर रहीं हैं। नया मामला शाहनगर वन परिक्षेत्र अंतर्गत शाहनगर व टिकरिया सर्किल में देखने को मिला। जहां पर वृक्षारोपण व खखरी निर्माण के नाम पर मजदूरों को ठेका दिया गया है। जहां पर मजदूरों को गड्ढे का रेट निर्धारित किया गया है साथ ही खखरी लगाने के लिए भी प्रति मीटर के हिसाब से उन्हे भुगतान किया जा रहा है। जहां मजदूरों को पूरे दिन काम करने के बाद निर्धारित मजदूरी से आधा भी हासिल नहीं हो पा रहा हैं।
गडढा खुदाई ठेके पर,निर्धारित से आधी भी नही मिल रही मजदूरीः-
उपरोक्त मामले के संबध में रैगुवां, हरवंशपुरा, ढेसाई, हरदुआ नर्सरी में कार्य करने वाले मजूदरों द्वारा बताया गया कि उन्हें वन विभाग द्वारा दैनिक मजदूरी पर काम न देकर प्रत्येक गढ्ढे के मान से ठेके पर उनसे काम लिया जा रहा है। कार्यस्थल पर जब मजदूरों से भुगतान के संबध में बात की गई तो उनमें से मुलायम सिंह, बहादुर, रामदास, विद्याबाई, क्षतिया पति शिकारी, सुनीता पति प्रभु, सावित्री, सबनीबाई, शिवकुमार आदि ने बताया कि हम सब लोगों को यहां की नर्सरी के लिए गढ्ढे खोदने हेतु लाया गया था।

यहां आने के बाद वन विभाग के लोगों द्वारा कहा गया कि तुम्हें गढ्ढों के हिसाब से भुगतान किया जायेगा जिसमें छोटे गढ्ढे का चार रूपये एवं बड़े गढ्ढों का साढ़े छरू रूपये के मान से भुगतान होगा। जब हम लोगों ने काम किया तो एक दिन में मुश्किल से 20 से 22 गढ्ढे ही खोद सके और उनकी मजदूरी किसी को 110 रूपये और किसी को 120 रूपये मिली। अब मजबूरी यह है कि कहीं काम न मिलने की वजह से हम लोगों को काम करना पड़ रहा है ताकि परिवार के लिये दो वक्त की रोटी जुटा सकें । गौरतलब है कि वन विभाग द्वारा कराये जा रहे कार्य दैनिक मजदूरी पर आधारित होते हैं इसमें ठेके की कोई व्यवस्था नहीं हैं। लेकिन कहीं न कहीं मजदूरों से आधे से भी कम मजूदरी भुगतान कर कराये जा रहे काम से मजदूरों का शोषण तो हो ही रहा है साथ ही शासकीय नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रहीं हैं।
निर्धारित दर अनुसार नही मिल रही मजदूरीः-जिले में वर्तमान सत्र में शासन द्वारा घोषित मजदूरी दरों के अनुसार अकुशल श्रमिकों के लिए एक दिन की मजदूरी 274 रूपये निर्धारित की गई है। जबकि शाहनगर परिक्षेत्र में नर्सरी के गढ्ढा खुदवाई के कार्य में लगे मजूदरों को शासकीय रेट से महज 40 प्रतिशत के लगभग मजदूरी का भुगतान कर कार्य कराया जा रहा है। जो एक तरह से श्रम नियमों के अनुसार अवैध कृत्य भी है ।
खखरी का काम भी ठेके पर,नाबालिग कर रहे मजदूरी-
बताया जाता है कि देवरा बीट में वृक्षारोपण कराया गया था, वृक्ष लगाने के बाद चारों तरफ खखरी से बाउण्ड्री का कार्य वन विभाग द्वारा कराया जा रहा है जिसमें बच्चियों को जिन्हें सीएम प्यार से अपनी भांजियां कहते हैं उन नाबालिग भांजियों तक को काम पर लगाया गया है। जिसके लिए इस कार्य को वहां पर पदस्थ रेंजर व वनकर्मीयों ने इसे ठेके पर दे रखा है। 70 रूपयें प्रति मीटर की दर से मजदूरों को भुगतान किया जा रहा है। जिससे पूरे दिन काम करने के बाद जब शाम को मजदूरी का भुगतान होता है तो 120 रूपयें से 150 रूपयें ही मजदूरों को मजदूरी मिल पा रही है। इसके अलावा उक्त कार्य नाबालिगों से भी करवाया जा रहा है, जो रेंजर व वनकर्मीयों की निगरानी में हो रहा है।

इनका कहना हैः- जब उपरोक्त मामले में वनमण्डलाधिकारी दक्षिण वन श्रीमती मीना मिश्रा से चर्चा की गयी तो उन्होंने कहा कि इस सबंध में उन्हें ऐसी जानकारी नही थी आपके द्वारा संज्ञान में लाया गया है वे अवश्य इस संबंध में वे यथा स्थिति की जानकारी लेंगी ठेका प्रथा या निर्धारित दर से कम मजदूरी पर यदि कार्य कराया जा रहा है तथा दैनिक मजदूरी दर से कम भुगतान किया जाता है, तो उस संबध में जानकारी लेकर उचित कार्यवाही की जायेगी। वहीं जब इस मामले में रेंजर से संपर्क करने का प्रयास किया तो मोबाइल नही लग पाने से संपर्क नही हो सका ।

 

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