महाष्टमी: जीवन मे सुख चाहिए तो महाष्टमी पर करें महागौरी की आराधना
धर्म डेस्क। नवरात्रि के नौ दिनों का अपना-अपना विशेष महत्व है लेकिन आठवें दिन अष्टमी पूजन की खास अहमियत मानी गई है। तभी इस दिन को महाष्टमी के रुप में मनाया जाता है। ये दिवस मां दुर्गा के महागौरी रूप को समर्पित है। गौर वर्ण होने के कारण इन्हें महागौरी कहा जाता है। मां कन्या पूजन करने वाले भक्तों से बहुत प्रसन्न होती हैं। अटल सुहाग की इच्छा करने वाली महिलाएं मां को चुनरी भेंट करें। मनचाहा जीवनसाथी पाने की इच्छुक कन्याएं मां को 16 श्रृंगार का सामान भेंट करें।
मां की पूजा आरंभ करने से पहले देवी महागौरी का इस मंत्र से ध्यान करें-
सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि। सेव्यामाना सदा भूयात सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥
जीवन का हर सुख चाहिए तो महाष्टमी पर ये पढ़ना न भूलें, महागौरी के मंत्र :
श्वेते वृषे समरूढा श्वेताम्बराधरा शुचिः। महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा।। या देवी सर्वभूतेषु मां गौरी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
माता महागौरी की कवच :
ओंकारः पातु शीर्षो मां, हीं बीजं मां, हृदयो।
क्लीं बीजं सदापातु नभो गृहो च पादयो॥
ललाटं कर्णो हुं बीजं पातु महागौरी मां नेत्रं घ्राणो।
कपोत चिबुको फट् पातु स्वाहा मा सर्ववदनो॥
आदि शक्ति मां दुर्गा का ध्यान करने वाले के जीवन में कभी शोक और दुख नहीं आता। मां का केवल एक रूप है, अनेक नहीं इस रहस्य का ज्ञात होने से जातक भगवान शिव की शक्ति के ओज मंडल में शामिल हो जाता है। भगवान शिव ने जब अपनी आराध्य शक्ति को नमस्कार कर उनकी पूजा की तो उस समय मंगल कामना के लिए इस श्लोक से महागौरी की स्तुति की थी। आप भी अपना कल्याण चाहते हैं तो इसे पढ़ कर मां को करें प्रसन्न-
या देवी सर्वभूतेषु श्रद्धा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।