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भोपाल में आयुष्मान भारत योजना से जुड़े निजी डॉक्टरों का प्रदर्शन: 6 महीने से अटका करोड़ों का भुगतान, NABH शर्त के खिलाफ सड़कों पर उतरे

भोपाल में आयुष्मान भारत योजना से जुड़े निजी डॉक्टरों का प्रदर्शन: 6 महीने से अटका करोड़ों का भुगतान, NABH शर्त के खिलाफ सड़कों पर उतरे

भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों का कैशलेस इलाज करने वाले निजी अस्पतालों के संचालकों का सब्र टूट गया है। पिछले 5-6 महीनों से योजना के बकाया भुगतान न मिलने और NABH (नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स) सर्टिफिकेशन की सख्त अनिवार्यता के विरोध में भोपाल के डॉक्टर बुधवार को विरोध-प्रदर्शन पर उतर आए।

यूनाइटेड प्राइवेट हॉस्पिटल एसोसिएशन (UPHDA) के बैनर तले डॉक्टरों ने जेपी अस्पताल परिसर स्थित आयुष्मान योजना के प्रदेश कार्यालय के बाहर जोरदार नारेबाजी की और धरना दिया।

प्रमुख मुद्दे और डॉक्टरों की चिंताएं:

1. 6 महीने से अटका करोड़ों रुपये का भुगतान

  • भोपाल में करीब 468 निजी अस्पताल आयुष्मान भारत योजना से संबद्ध हैं।

  • डॉक्टरों का दावा है कि प्रत्येक अस्पताल का औसतन 1.5 से 2 करोड़ रुपये का भुगतान पिछले 5-6 महीनों से रुका हुआ है।

  • यूनाईटेड प्राइवेट हॉस्पिटल एसोसिएशन के उपाध्यक्ष डॉ. धनंजय मिश्रा के अनुसार, लंबे समय से भुगतान अटकने के कारण अस्पतालों के लिए मेडिसिन वेंडरों, पैथोलॉजी लैब्स, डॉक्टरों और स्टाफ का वेतन देना भारी पड़ रहा है।

2. 1 अक्टूबर से NABH अनिवार्यता व डी-एम्पैनलमेंट की तलवार

  • स्वास्थ्य विभाग 1 अक्टूबर से भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जैसे बड़े शहरों में बिना NABH (कम्पलीट या एंट्री लेवल) सर्टिफिकेशन वाले छोटे और मध्यम अस्पतालों को योजना से डी-एम्पैनल (सूची से बाहर) करने की तैयारी में है।

  • प्रदर्शनकारी डॉक्टरों ने मांग की है कि NABH मानकों को अनिवार्य (Mandatory) बनाने के बजाय स्वैच्छिक (Voluntary) और प्रोत्साहन आधारित (Incentive-based) बनाया जाना चाहिए।

मरीजों और स्वास्थ्य व्यवस्था पर असर

अस्पताल संचालकों का कहना है कि यदि एक साथ दर्जनों छोटे और मध्यम अस्पतालों को योजना से बाहर किया जाता है:

  • गरीब व मध्यमवर्गीय मरीजों की परेशानी: मरीज अपने नजदीकी निजी अस्पतालों में मुफ्त इलाज की सुविधा से वंचित हो जाएंगे।

  • सरकारी अस्पतालों पर दबाव: निजी अस्पतालों के बाहर होने से जेपी अस्पताल और हमीदिया जैसे सरकारी अस्पतालों पर अचानक मरीजों का अत्यधिक बोझ बढ़ जाएगा।

मांगें पूरी न होने पर प्रदेशव्यापी हड़ताल की चेतावनी

हॉस्पिटल एसोसिएशन ने राज्य सरकार से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक कर व्यावहारिक समाधान निकालने की अपील की है।

डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि 1 अक्टूबर को अस्पतालों के खिलाफ बड़े पैमाने पर डी-एम्पैनलमेंट की दंडात्मक कार्रवाई की जाती है, तो पूरे मध्य प्रदेश में निजी अस्पताल सामूहिक रूप से हड़ताल और उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।

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