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जशपुर के सुदूर गांव से एशियन गेम्स के पोडियम तक: जानिए धावक अनिमेष कुजूर के संघर्ष, राष्ट्रीय रिकॉर्ड और कांस्य पदक की प्रेरक कहानी

जशपुर के सुदूर गांव से एशियन गेम्स के पोडियम तक: जानिए धावक अनिमेष कुजूर के संघर्ष, राष्ट्रीय रिकॉर्ड और कांस्य पदक की प्रेरक कहानी

रायपुर: जब हौसले बुलंद हों और मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो अभावों की पगडंडियां भी अंतरराष्ट्रीय मंच का रास्ता बन जाती हैं। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के सुदूर गांव घुइतांगर से निकलकर एशियन गेम्स के पोडियम तक पहुंचे युवा एथलीट अनिमेष कुजूर की सफलता संघर्ष, अनुशासन और अटूट विश्वास की एक अद्वितीय मिसाल है।

एशियन गेम्स में रचा इतिहास: ब्रॉन्ज मेडल के साथ तोड़ा नेशनल रिकॉर्ड

सीमित संसाधनों के बावजूद अनिमेष ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का परचम लहराया। एशियन गेम्स में भारतीय टीम ने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया:

  • इवेंट: $4 \times 100$ मीटर मिश्रित रिले (Mixed Relay)।

  • टीम के खिलाड़ी: अनिमेष कुजूर, गुरिंदरवीर सिंह, स्नेहा शानुवाली और हरिता भद्रा।

  • उपलब्धि: भारतीय चौकड़ी ने 41.06 सेकंड का समय निकालकर न केवल कांस्य पदक (Bronze Medal) अपने नाम किया, बल्कि 41.35 सेकंड का पुराना राष्ट्रीय रिकॉर्ड (National Record) भी ध्वस्त कर दिया।

फिसलने के बाद भी नहीं खोया धैर्य: सेमीफाइनल में दिखाया जज्बा

अनिमेष की यह राह आसान नहीं थी। सेमीफाइनल हीट के दौरान बारिश से गीले ट्रैक पर बैटन बदलते समय उनका पैर अचानक फिसल गया था। किसी भी एथलीट के लिए यह मानसिक दबाव का क्षण हो सकता था, लेकिन सैनिक स्कूल के अनुशासन में पले-बढ़े अनिमेष ने तुरंत खुद को संभाला, फिर से रफ्तार पकड़ी और टीम को फाइनल का टिकट दिलाया।

सैनिक स्कूल से स्प्रिंट ट्रैक तक का सफर

  • जन्म व पारिवारिक पृष्ठभूमि: 2 जून 2003 को जन्मे अनिमेष को खेल विरासत में मिले। उनकी मां हॉकी खिलाड़ी रही हैं, जबकि पिता पुलिस विभाग में कार्यरत रहते हुए एथलीट और फुटबॉलर रहे हैं।

  • सेना का सपना: अंबिकापुर सैनिक स्कूल में पढ़ाई के दौरान वे भारतीय सेना में जाने की तैयारी कर रहे थे।

  • टर्निंग प्वाइंट: कोरोना काल में फिटनेस के लिए फुटबॉल खेलते-खेलते उन्होंने दोस्तों की सलाह पर एक स्थानीय दौड़ प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। उनकी तेज रफ्तार देखकर विशेषज्ञों ने उन्हें पेशेवर स्प्रिंटर बनने की सलाह दी।

लंबाई को बनाया ताकत और राष्ट्रीय स्तर पर जमाई धाक

1.88 मीटर लंबे अनिमेष के लिए शुरुआत में बॉडी फ्लेक्सिबिलिटी और रनिंग तकनीक एक चुनौती थी। हालांकि, ओडिशा स्थित रिलायंस फाउंडेशन एथलेटिक्स हाई परफॉरमेंस सेंटर में कोच मार्टिन ओवेंस की देखरेख में उन्होंने अपनी तकनीक में सुधार किया।

प्रमुख राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियां:

  • यू-23 नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप: 200 मीटर में स्वर्ण पदक (Gold Medal)।

  • सीनियर फेडरेशन कप: 200 मीटर में 20.40 सेकंड के समय के साथ मीट रिकॉर्ड व स्वर्ण पदक; 100 मीटर में 10.15 सेकंड के साथ रजत पदक (Silver Medal)।

  • ड्रामिया इंटरनेशनल स्प्रिंट मीट (ग्रीस): 10.18 सेकंड के साथ कांस्य पदक।

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