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पड़ाव की महाकाली विसर्जन में ड्राइवर, पंडित और पहरेदार भी रहेंगे पहरे में

जबलपुर। पुराने अनुभवों से सबक लेते हुए प्रशासन और पुलिस ने इस बार कोरोना संक्रमणकाल में दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन पूरी तरह नियमों के दायरे में कराने का निर्णय लिया है।

यही वजह है कि प्रसिद्ध और ज्यादा संख्या में श्रद्धालुओं के साथ विसर्जन वाली प्रतिमाओं को लेकर प्रशासन ने नए उपाय खोजे हैं। पड़ाव वाली महाकाली की प्रतिमा के विसर्जन के दौरान पंडित, ड्राइवर और पहरेदार सभी पुलिस और प्रशासन के होंगे।

चूंकि दो साल पहले विसर्जन के दौरान ग्वारीघाट में विवाद और हंगामा हो गया था। इस बार समिति के पदाधिकारियों के बीच होने वाली अनबन भी विसर्जन में विघ्न डाल सकती थी। साथ-साथ कोरोना संक्रमण के मद्देनजर भी प्रशासन को यह कदम उठाना पड़ा है।

रूट और समय पहले पूछा

  • सूत्रों के मुताबिक गढ़ाफाटक वाली वृहद महाकाली समिति के अलावा अन्य प्रसिद्ध दुर्गा प्रतिमा समिति पदाधिकारियों को अपर कलेक्टर संदीप जीआर से लेकर पुलिस व प्रशासन के आला अधिकारियों ने अलग से बैठक लेकर समझाइश दी है। सभी समितियों से कहा गया कि वह अपना रूट यानी मार्ग बताएंगे और मार्ग लंबा नहीं होगा। जिससे कम समय में प्रतिमा का सीमित श्रद्धालुओं के साथ विसर्जन किया जा सके और लोगों को संक्रमण से बचाया जा सके। इसके लिए गढ़ाफाटक वाली महाकाली समिति ने रात 12 बजे प्रतिमा का विसर्जन करना तय किया है।
    इस बारे में सोशल मीडिया पर भी प्रचार होने लगा है। प्रतिमा रात 12 बजे अपने स्थल से रवाना की जाएगी और गढ़ाफाटक, रानीताल, मालवीय चौक, बड़ा फुहारा, कोतवाली होकर हनुमानताल में विसर्जित की जाएंगी। इसी तरह शहर के बीच स्थापित प्रतिमाओं के लिए भी इसी तरह का नियम लागू किया गया है।

विसर्जन स्थल पर भी रहेगा पहरा

  • प्रतिमाओं के विसर्जन वाले मार्ग से लेकर हनुमानताल सहित ग्वारीघाट के भटौली कुंड, तिलवारा और अन्य विसर्जन स्थलों पर इस बार पुलिस का पहरा रहेगा। पहले भी पुलिस बल की तैनाती की जाती थी, लेकिन इस बार कोविड के चलते कुछ ज्यादा सख्ती बरती जाएगी। जिससे जनता ज्यादा संख्या में विसर्जन स्थलों पर नहीं पहुंच सके।

एसडीएम अधारताल ऋषभ जैन, ने बताया कि दुर्गा समितियों के पदाधिकारियों को कोरोना संक्रमण की गाइडलाइन से अवगत कराया गया है। सभी का सहयोग भी मिला है। समय और रूट के बारे में भी समितियों से जानकारी प्राप्त की गई है। जिससे कम समय में प्रतिमाओं का विसर्जन किया जा सके और भीड़ भी एकत्रित न हो।

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