प्रदेश में पहली बार वित्तीय वर्ष शुरू होने के साथ ही सरकार को बजट खर्च की सीमा तय

भोपाल। प्रदेश के वित्तीय हालात सामान्य नहीं हैं, यह बात अब किसी से छुपी नहीं है। आलम यह है कि निर्माण विभागों के ऊपर ठेकेदारों की उधारी 500 करोड़ रुपए से ज्यादा चढ़ गई है। अकेले लोक निर्माण विभाग को करीब 200 करोड़ रुपए का भुगतान करना है।
विभाग को मई में 750 करोड़ रुपए खर्च करने की इजाजत मिली थी, इसका पूरा उपयोग हो गया पर जून का भुगतान अटक गया। हालात खस्ता होने पर विभाग ने जुलाई के लिए 800 करोड़ रुपए वित्त विभाग से मांगे हैं। यही स्थिति अस्पतालों के रखरखाव के कामों की भी है जो बजट की कमी से प्रभावित हो रहे हैं। प्रदेश में पहली बार इस स्थिति के कारण वित्तीय वर्ष शुरू होने के साथ ही सरकार को बजट खर्च की सीमा तय करनी पड़ी है।
ताजा मामला निर्माण विभागों से जुड़ा है। योजना और आयोजना व्यय की व्यवस्था समाप्त होने के बाद विभाग को हर तिमाही में वेतन-भत्ते सहित अन्य कामों के लिए बजट आवंटित होता है। वित्त विभाग ने वित्तीय वर्ष शुरू होते ही सभी विभागों पर यह पाबंदी लगा दी कि वे कुल बजट का दस प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा किसी एक माह में खर्च नहीं करेंगे। उधर, लोक निर्माण विभाग ने चुनाव को मद्देनजर रखते हुए एक साथ काम शुरू कर दिए हैं। अब ठेकेदारों को भुगतान करना है लेकिन विभाग के पास बजट ही नहीं है।
हालात यह बन गए हैं कि जून और मध्य जुलाई तक अधिकांश मदों में राशि ही नहीं बची। यही हाल अस्पतालों के रखरखाव में लगने वाले और सिंचाई परियोजनाओं के बजट का भी बताया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि अस्पतालों के लिए 20 करोड़ रुपए से ज्यादा दूसरे विभाग से उधार लेने पड़े हैं।
एकाएक बढ़े खर्चों ने बिगाड़ा गणित
वित्त विभाग के उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि आय से अधिक खर्च ने पूरा गणित गड़बड़ा दिया है। किसानों को वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में ही आठ हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का भुगतान किया गया। इससे दूसरे खर्चों में कटौती करनी पड़ी। बजट में सालभर के हिसाब से प्रावधान किए गए हैं, लेकिन विभाग सितंबर तक ज्यादातर हिस्सा चाहते हैं। यह संभव नहीं है क्योंकि आय के आधार पर ही खर्च का इंतजाम होता है।
वैसे केंद्र सरकार से करों के हिस्से के चार हजार करोड़ रुपए मिल रहे हैं। इससे काफी काम चल जाएगा। वहीं, चार हजार करोड़ रुपए से ज्यादा बाजार से कर्ज भी लिया जा चुका है। लोक निर्माण विभाग को भी राजमार्ग निधि के आधार पर सरकार की गारंटी पर कर्ज लेने की अनुमति कैबिनेट ने दी है।
हर माह के लिए साढ़े चार सौ करोड़ मांगे
सूत्रों का कहना है कि लोक निर्माण विभाग ने सितंबर तक हर माह साढ़े चार सौ करोड़ रुपए मांगे हैं। अधिकारियों का कहना है कि विभाग की रणनीति बारिश खुलने के बाद तेजी के साथ काम शुरू करने की है। इसके लिए जरूरी है कि ठेकेदारों को नियमित राशि मिलती रहे। यही वजह है कि निर्माण विभागों ने वित्त विभाग से कहा है कि यदि राशि नहीं मिलती है तो ठेकेदार और विभागों के बीच खटास पैदा हो जाएगी, जिसका असर कामों की रफ्तार पर पड़ सकता है।








