
वॉशिंगटन। शोधकर्ताओं को ऑटोइम्युन रोग के इलाज में काम आने वाली दवाओं में पार्किंसन से बचाव की संभावना दिखी है। उनका दावा है कि उन लोगों में यह बीमारी होने का जोखिम कम हो सकता है जो इम्युन सिस्टम (प्रतिरक्षा प्रणाली) को नियंत्रित करने वाली दवाओं का सेवन करते हैं।

डिमेंशिया मानसिक विकार है। इसमें व्यक्ति की याददाश्त कमजोर हो जाती है और चलने-फिरने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, अल्सरेटिव कोलाइटिस समेत कई तरह के ऑटोइम्युन रोगों से पीड़ित व्यक्ति में पार्किंसन की जल्दी पहचान नहीं हो पाती है।
कई ऑटोइम्युन रोगों में एक बात सामान्य होती है कि इनका इलाज ऐसी दवाओं से किया जाता है जो इम्युन गतिविधियों पर अंकुश लगाती हैं। अमेरिका की वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता ब्राड रैकेट ने कहा, “हमने पाया कि कुछ खास तरह की इम्युनोसप्रेसेंट दवाओं से पार्किंसन के बढ़ते खतरे पर अंकुश लग सकता है।”
ज्यादा मोटापे से हृदय रोग का खतरा
क्या आप मोटापे से पीड़ित हैं और हाई ब्लड प्रेशर, असामान्य ब्लड शुगर और ब्लड फैट जैसी समस्याओं से मुक्त हैं? तो भी आपको सावधान रहने की जरूरत है। एक नए शोध का दावा है कि ऐसी महिलाओं में हृदय रोग का खतरा ज्यादा हो सकता है।
यह निष्कर्ष 90 हजार से ज्यादा महिलाओं पर किए गए अध्ययन के आधार पर निकाला गया है। जर्मनी के शोधकर्ताओं के अनुसार, महिलाएं मेटाबोलिक रोग से पीड़ित हों या नहीं, लेकिन मोटापा हृदय संबंधी रोगों के लिए बड़ा कारक होता है।
जर्मन इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन न्यूट्रिशन पोट्सडेम-रेहब्रुके के प्रोफेसर मत्थिअस शुल्जे ने कहा, “हमारे अध्ययन से जाहिर होता है कि मोटापे से पीड़ित और मेटाबोलिक (उपापचयी) रोगों से मुक्त रहने वाली महिलाओं को हृदय रोगों के बढ़ते खतरे का सामना करना पड़ सकता है।”








