
कटनी में जब भीषण गर्मी में शहर से लेकर गांव तक हर जगह पर पानी की त्राहि-त्राहि मची है। उसी समय नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण को अपर कलेक्टर ने तालाब पाटने की अनुमति भी दे दी है। जिससे स्थानीय लोगों में रोष है। वर्तमान में तो जलस्रोतों के अस्तित्व को किसी तरह से बदला नहीं जा सकता, लेकिन यहां पर तो पानी भरे तालाब का अस्तित्व ही इस सीजन में समाप्त किया जा रहा है। तर्क यह है कि इसके आसपास से टनल गुजरेगा। तालाब का पानी रिसकर टनल के अंदर न पहुंचने पाए। जिसके लिए तालाब पाटा जाना आवश्यक है।
पर सवाल यह है कि कार्यपालन यंत्री, एसडीएम कार्यालय और एडीएम कार्यालय के बीच दो दिन के अंतराल में ही यह सब काम हो गया। आम जन यदि कोई आवेदन लगाए या फिर शासकीय योजनाओं का लाभ ही लेना हो, तो उसे कई बार चक्कर लगाने पड़ते हैं, लेकिन यहां पर आनन-फानन में इस तरह से कार्य हुआ 18 मई को एनवीडीए संभाग क्रमांक 5 ने इस संबंध में एसडीएम बहोरीबंद को पत्र लिखा। अगले दिन 19 मई को यह पत्र एसडीएम कार्यालय से एडीएम कार्यालय पहुंचा और यहां पर उसी दिन हरी झण्डी भी दे दी गई। अधिकारियों को किस बात की जल्दीबाजी थी, इस पर सवाल है।
बहरहाल एडीएम ने माना तालाब में अभी अधिक पानी है यह तालाब सूखा नहीं है और इसमें पानी पर्याप्त है। एडीएम ने भी अनुमति पत्र में माना है कि उक्त तालाब में पानी अधिक मात्रा में भरा है। जिससे टनल निर्माण कार्य प्रभावित होगा। टनल निर्माण की प्रगति के लिए स्लीमनाबाद तालाब को वर्षा ऋतु के पूर्व मिट्टी से पुराई करने की अनुमति चाही गई है। लोगों का कहना है कि जब टनल को लेकर ड्राइंग-डिजाइन तैयार किया गया था, उसी समय तालाब को लेकर किसी तरह की योजना क्यों नहीं बनाई गई। यह समझ से परे है।








