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PM नरेंद्र मोदी चीन पहुंचे जिनपिंग से करेंगे मुलाकात

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री मोदी चीन के शहर वुहान पहुंच गए हैं। शुक्रवार और शनिवार को मध्य चीन के औद्योगिक शहर वुहान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग की वार्ता की सारी तैयारियां मुकम्मल है।

पीएम मोदी की गुरुवार शाम को रवानगी से पहले दोनों देशों के अधिकारियों ने शीर्ष नेताओं के बीच वार्ता की रूपरेखा तैयार कर ली। उड़ान भरने से पहले पीएम मोदी ने भी ट्वीट कर वार्ता का एजेंडा तय करने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने कहा “रणनीतिक व लंबी अवधि के लक्ष्यों को लेकर होगी यह बातचीत।”

मोदी और चिनफिंग के बीच अगले दो दिनों तक कई दौर में बातचीत होगी। दोनो नेताओं के बीच कम से कम दो बार द्विपक्षीय मुद्दों पर अकेले में बात होगी जबकि एक बार शीर्ष स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ वार्ता होगी। दोनों देशों ने इसे एक अनौपचारिक वार्ता का नाम दिया है जिसमें आपसी रिश्तों से जुड़े हर मुद्दे को उठाया जाएगा और अहम समस्याओं का स्थाई समाधान निकालने पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा। मोदी ने भी इसके संकेत दिए।

उन्होंने ट्वीट किया, “मैं और राष्ट्रपति चिनफिंग द्विपक्षीय और वैश्विक महत्व के तमाम विषयों पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे। हम खास तौर पर मौजूदा वैश्विक परिवेश के संदर्भ में राष्ट्रीय विकास के मुद्दों पर अपनी प्राथमिकताओं के बारे में भी बात करेंगे। हम रणनीतिक व लंबी अवधि के परिप्रेक्ष्य में भारत-चीन रिश्तों पर बात करेंगे।”

उधर, बैठक से ठीक पहले चीन की तरफ से ही बेहद सकारात्मक संकेत मिले। चीन की सरकारी मीडिया ने जहां मोदी और चिनफिंग की मुलाकात को एतिहासिक करार दिया, वहीं चीन की सेना पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने उम्मीद जताई कि दोनों नेताओं की बैठक के बाद सैन्य स्तर पर भी भारत व चीन के रिश्तों में स्थिरता आएगी व सीमा पर शांति बनाने में मदद मिलेगी।

विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि बातचीत का माहौल कुछ वैसा ही होगा जैसा वर्ष 2014 में राष्ट्रपति चिनफिंग की अहमदाबाद यात्रा के दौरान था। तब पीएम मोदी ने महात्मा गांधी के साबरमती आश्रम में चिनफिंग का स्वागत किया था। दोनों ने काफी देर तक द्विपक्षीय मसलों पर एक खुले माहौल में बात की थी। इस बार भी दोनों नेताओं के बीच कई दौर में बातचीत होगी।

वुहान में चीन के पूर्व क्रांतिकारी नेता माओ जेडोंग से जुड़ी कई इमारतें हैं। यह संभव है कि मोदी को लेकर चिनफिंग उन इमारतों की सैर करायें। चीन की सरकार पहले ही कह चुकी है कि मोदी का उनकी उम्मीद से भी बेहतर तरीके से स्वागत किया जाएगा।

वैसे, अहमदाबाद में चिनफिंग की आगवानी का भारत-चीन के रिश्तों पर कोई बहुत सकारात्मक असर नहीं पड़ा था। असलियत में उसके बाद रिश्तों में काफी उतार देखा गया। लेकिन इस बार दोनों पक्ष उम्मीद लगा रहे हैं कि हाल के महीनों में हर मुद्दों पर जो तनातनी का माहौल बना था उसे अब दूर किया जा सकेगा।

मोदी ने जिन लंबी अवधि के लक्ष्यों की बात कही है उसमें रणनीतिक व आर्थिक दोनों होंगे। इसमें चीन की महत्वाकांक्षी बॉर्डर रोड इनिशिएटिव (बीआरआइ- विभिन्न देशों को इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं से जोड़ने की योजना), भारत-चीन सीमा का स्थाई समाधान निकालना, भारत के साथ व्यापार घाटे को कम करने जैसे मुद्दे भी होंगे। ये तीन ऐसे मसले हैं जिनकी वजह से आपसी रिश्तों में सबसे ज्यादा तल्खी है। माना जाता है कि उन तीनों मुद्दों पर जितना ज्यादा ये देश आपसी सहमति विकसित करेंगे रिश्तों को सामान्य बनाने में उतनी ही मदद मिलेगी।

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