राष्ट्रीय

नदियों के संरक्षण पर आधारित होगा राजिम कुंभ

रायपुर। राजिम में महानदी, पैरी और सोंढूर नदियों के संगम पर आयोजित होने वाला कल्प कुंभ इस बार नदियों के संरक्षण पर आधारित होगा। 31 जनवरी को माघ पूर्णिमा के अवसर पर राजिम कुंभ कल्प का शुभारंभ होगा। 7 फरवरी को जानकी जयंती के दिन संत समागम होगा जिसमें देशभर के साधु अखाड़े पहुंचेंगे।

धर्मस्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने बताया कि नदियों के संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए संत समागम के दिन प्रदेश की ढाई करोड़ जनता की ओर से ढाई लाख दीए प्रज्जवलित किए जाएंगे। इस दिन गंगा आरती का आयोजन किया जाएगा। यह देश का सबसे बड़ा आयोजन होगा।

31 जनवरी को मुख्यमंत्री व विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल की उपस्थिति में मेले का शुभारंभ किया जाएगा। संत समागम के अगले दिन 8 फरवरी को 11 सौ शंखों के साथ शंखनाद का कार्यक्रम रखा गया है। शंखनाद के लिए प्रदेश के विभिन्न् मंदिरों से पुजारी बुलाए गए हैं। संत समागम के दिन शंकराचार्च स्वामी स्वरूपानंद जी भी पधार रहे हैं। कुंभ के दौरान महानदी संरक्षण दौड़ का आयोजन भी किया जा रहा है। कुंभ के दौरान अलग-अलग तिथियों पर स्नान के लिए नदी में स्थल निर्धारित किए गए हैं। सुरक्षा व्यवस्था और दूसरी व्यवस्थाएं भी दुरूस्त की जा रही हैं।

दिनों दिन बढ़ रही राजिम कुंभ की ख्याति

कुछ साल पहले तक राजिम में माघ मेले का आयोजन किया जाता था। तीन नदियों की त्रिवेणी संगम पर स्थित राजिम में संगम स्थल पर कुलेश्वर महादेव का मंदिर स्थित है। मेले को राजीव लोचन महोत्सव के रूप में मनाया जाता था जो माघ पूर्णिमा से शिवरात्रि तक चलता था। 2005 से छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति विभाग ने इसे कल्प कुंभ का रूप दिया। कुंभ का स्वरूप मिलते ही इसकी ख्याति दिनोंदिन बढ़ने लगी है। अब यहां लाखों श्रद्धालु आते हैं।

कल्पवास से होती है शुरूआत

कुंभ की शुरूआत कल्पवास से होती है। पखवाड़े भर पहले से श्रद्धालु पंचकोशी यात्रा प्रारंभ कर देते हैं। इसमें पटेश्वर, फिंगेश्वर, ब्रम्हनेश्वर, कोपेश्वर तथा चम्पेश्वरनाथ के पैदल दर्शन की सदियों साल पुरानी परंपरा का निर्वहन किया जाता है। 101 किलोमीटर की यात्रा का समापन माघ पूर्णिमा के दिन राजिम में होता और यहीं कुंभ शुरू होता है। स्थानीय मान्यता है कि भगवान राजीव लोचन और कुलेश्वर महादेव के दर्शन के बिना जगन्न्ाथपुरी की यात्रा पूरी नहीं होती। इस कुंभ का स्थानीय लोगों में बहुत महत्व है।

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