नई दिल्ली। कोविड-19 के विश्वव्यापी प्रकोप के चलते घरेलू बाजार से लेकर वैश्विक बाजार तक किसानों के लिए ‘अंगूर खट्टे’ लगने लगे हैं। मजदूरों की किल्लत के चलते अंगूर की तुड़ाई भी प्रभावित हो रही है। लेकिन कृषि वैज्ञानिकों की पेड़ों पर ही अंगूर के गुच्छों को सुखाकर किशमिश में बदलने की टेक्नोलॉजी से किसानों को बड़ी उम्मीद बंधी है। हर साल लगभग ढाई हजार करोड़ रुपये मूल्य का निर्यात होने वाला अंगूर इस बार धरा रह गया।
लॉकडाउन के चलते अंगूर के बागानों में तुड़ाई का काम ठप
महाराष्ट्र में कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते उत्पादक मंडियों में कारोबार बंद रहा, जिसकी वजह से घरेलू बाजार में भी अंगूर की सामान्य सप्लाई भी नहीं हो सकी है। लॉकडाउन की वजह से अंगूर के बागानों में मजदूरों का सख्त अभाव हो गया। लिहाजा किसानों की हालत तंग हो गई। अंगूर की तुड़ाई का काम ठप हो गया।
बेल पर ही अंगूर के गुच्छों को सुखाकर किशमिश बनाने की तकनीक से किसानों को मदद
इस मुश्किल वक्त में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आइसीएआर) के वैज्ञानिकों की पेड़ों (लता) पर ही अंगूर के गुच्छों को सुखाकर किशमिश बनाने की टेक्नोलॉजी वरदान बनकर आई। आइसीएआर के हार्टिकल्चर उप महानिदेशक डॉक्टर एके सिंह ने बताया कि इस विधि से अंगूर किसानों को होने वाले नुकसान को रोकने में मदद मिली है।
नई तकनीक से 12वें दिन में अंगूर सूखकर किशमिश में बदल जाता है
डॉक्टर सिंह ने बताया कि इसके तहत पेड़ पर अंगूर के पके गुच्छों को चार से पांच दिन ही रोका जा सकता है, जिसके बाद वह खराब होने लगता है। निर्यात न होने और घरेलू बाजार में मांग घटने की वजह से महाराष्ट्र के किसानों की हालत बहुत खराब हो रही थी। इसे सुखाकर किशमिश बनाने के लिए मजदूर नहीं मिल रहे थे, जो बागों से अंगूर तोड़ सकें। इसीलिए यह टेक्नोलॉजी काम आई। इसमें दो खास तरह के रसायनों (एथाइल ओलियट और पोटैशियम कार्बोनेट) को पानी में मिलाकर गुच्छों पर एक निश्चित समय के अंतर पर तीन छिड़काव करना होता है। इसके 12वें दिन तक अंगूर सूखकर किशमिश में बदल जाता है।
पिछले साल 2.46 लाख टन अंगूर का निर्यात हुआ था
उप महानिदेशक डाक्टर सिंह ने बताया ‘पिछले साल 2335 करोड़ रुपये की लागत का 2.46 लाख टन अंगूर का निर्यात किया गया था। लेकिन चालू सीजन में छह अप्रैल तक केवल 85 हजार टन अंगूर का निर्यात यूरोपीय संघ के देशों को किया जा सका।’ अंगूर के कुल उत्पादन का 85 फीसद अकेले महाराष्ट्र में होता है, जबकि बाकी में कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना प्रमुख हैं। देश के 1.37 लाख हेक्टेयर भूमि में अंगूर की खेती की जाती है।
महाराष्ट्र में मजदूरों की कमी से अभी आठ लाख टन अंगूर तोड़े जाने हैं
महाराष्ट्र के प्रमुख अंगूर उत्पादक क्षेत्रों में अभी भी सात से आठ लाख टन अंगूर तोड़े जाने हैं, लेकिन मजदूरों की कमी से यह संभव नहीं है। इस चुनौती से निपटने में अंगूर को पेड़ पर ही सुखाने वाली टेक्नोलॉजी काफी कारगर साबित हो रही है। एग्रीकल्चरल एंड प्रोसेस्ड फूड प्रॉडक्ट एक्सपोर्ट डवलपमेंट अथारिटी (एपीडा) के मुताबिक भारत ने पिछले साल लगभग 250 करोड़ रुपये की लागत की 20 हजार टन किशमिश का निर्यात किया था। किशमिश की मांग टर्की, अमेरिका, चिली, यूरोपीय संघ के देशों के अलावा दक्षिणी अफ्रिकी देशों में है।
