नई दिल्ली: Gold Price Alert: अगले 12 महीने में ₹2 लाख के पार जा सकता है सोना! ग्लोबल बैंक की भविष्यवाणी से बाजार हैरान, जानें तेजी की 5 बड़ी वजहें। अगर आप सोना खरीदने की सोच रहे हैं या इसमें निवेश करते हैं, तो यह खबर आपके होश उड़ा सकती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार के प्रतिष्ठित सैक्सो बैंक (Saxo Bank) के कमोडिटी स्ट्रैटजी हेड ओले हेनसेन ने सोने को लेकर एक बेहद सनसनीखेज अनुमान जताया है। हेनसेन के मुताबिक, अगले 12 महीनों के भीतर ग्लोबल मार्केट में सोना 6,000 डॉलर प्रति औंस ($6,000/oz) के जादुई आंकड़े को पार कर सकता है।
Gold Price Alert: अगले 12 महीने में ₹2 लाख के पार जा सकता है सोना! ग्लोबल बैंक की भविष्यवाणी से बाजार हैरान, जानें तेजी की 5 बड़ी वजहें
यदि यह अंतरराष्ट्रीय भविष्यवाणी सच साबित होती है, तो भारतीय सर्राफा बाजारों में भी सोने के भाव में ऐसी आग लगेगी कि कीमतें आम आदमी की पहुंच से कोसों दूर हो जाएंगी।
समझिए भारतीय बाजार का पूरा गणित: ₹1.59 लाख से सीधे ₹2.12 लाख!
फिलहाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोना 4,490 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है। वहीं, भारतीय घरेलू बाजार में 10 ग्राम सोने का भाव इतिहास के सबसे ऊंचे स्तर यानी करीब 1.59 लाख रुपये तक पहुंच चुका है।
अगर ग्लोबल मार्केट में भाव 4,490 डॉलर से बढ़कर 6,000 डॉलर जाता है, तो भारत में इसका सीधा असर कुछ इस तरह दिखेगा:
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33.6% की भारी उछाल: अंतरराष्ट्रीय कीमतों में यह मौजूदा स्तर से करीब 33.6 फीसदी की तेजी होगी।
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₹53,000 की सीधी बढ़ोतरी: इसी रफ्तार से अगर भारतीय बाजार आगे बढ़ा, तो सोने का भाव 1.59 लाख रुपये से बढ़कर सीधे 2.12 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर को छू लेगा।
नोट: भारत में सोने की अंतिम दरें सिर्फ वैश्विक कीमतों से तय नहीं होतीं। इसमें अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल, सरकार की इंपोर्ट ड्यूटी (आयात शुल्क) और 3% जीएसटी (GST) जैसे घरेलू कारक भी शामिल होते हैं, जिससे वास्तविक भाव थोड़ा और ऊपर-नीचे हो सकता है।
सोने को ‘रॉकेट’ बनाने वाले 5 सबसे बड़े फैक्टर्स:
सैक्सो बैंक के ओले हेनसेन के अनुसार, भले ही अभी मजबूत अमेरिकी डॉलर और ऊंचे बॉन्ड यील्ड का दबाव है, लेकिन लंबी अवधि में निम्नलिखित 5 कारण सोने को आसमान पर ले जाएंगे:
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डी-डॉलराइजेशन (De-Dollarization): दुनिया भर के केंद्रीय बैंक (जैसे RBI, चीन का केंद्रीय बैंक) अमेरिकी डॉलर पर अपनी निर्भरता कम कर रहे हैं और फॉरेक्स रिजर्व में डॉलर के बदले जमकर सोना खरीद रहे हैं।
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भू-राजनीतिक तनाव (Geo-Political Tension): पश्चिम एशिया (Mid-East Crisis) में जारी युद्ध और तनाव के चलते निवेशक जोखिम भरे एसेट्स (शेयर बाजार) से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश (Safe Haven) यानी सोने की तरफ भाग रहे हैं।
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डी-ग्लोबलाइजेशन (De-Globalization): वैश्विक सप्लाई चेन टूटने से देश अब एक-दूसरे पर निर्भर रहने के बजाय अपनी अर्थव्यवस्था को सुरक्षित करने के लिए सोने का बैकअप बढ़ा रहे हैं।
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महाशक्तियों पर बढ़ता सरकारी कर्ज: अमेरिका और यूरोपीय देशों पर बढ़ता भारी-भरकम सरकारी कर्ज वैश्विक आर्थिक मंदी का डर पैदा कर रहा है, जिससे निवेशकों का करेंसी पर से भरोसा उठ रहा है।
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सुरक्षित निवेश की तगड़ी मांग: शेयर बाजारों के भारी उतार-चढ़ाव के बीच सोने को दुनिया का सबसे वफादार और सुरक्षित एसेट माना जा रहा है।
कच्चे तेल (Crude Oil) की महंगाई भी देगी सोने को हवा
सोने की इस रिकॉर्ड तोड़ तेजी में कच्चे तेल की भी बड़ी भूमिका होने वाली है। पश्चिम एशिया के तनाव और होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) संकट के कारण ब्रेंट क्रूड फिलहाल 105 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर मंडरा रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर यह तनाव थोड़ा कम भी होता है, तब भी क्रूड ऑयल का नया बेस 85 से 95 डॉलर के बीच ही टिकेगा। कच्चा तेल महंगा होने से वैश्विक स्तर पर महंगाई (Inflation) बढ़ेगी। इतिहास गवाह है कि दुनिया में जब-जब महंगाई बढ़ती है, लोग अपने पोर्टफोलियो को बचाने के लिए सबसे ज्यादा सोना खरीदते हैं, जिससे इसकी मांग और कीमतें दोनों बेकाबू हो जाती हैं।

