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SEBI New Proposal: नौकरीपेशा लोगों के लिए बड़ी खबर- अब कंपनी सीधे सैलरी से काटकर म्यूचुअल फंड में कर सकेगी निवेश; सेबी लाया नया प्रस्ताव

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मुंबई: SEBI New Proposal: नौकरीपेशा लोगों के लिए बड़ी खबर- अब कंपनी सीधे सैलरी से काटकर म्यूचुअल फंड में कर सकेगी निवेश; सेबी लाया नया प्रस्ताव। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने देश के करोड़ों नौकरीपेशा (Salaried) कर्मचारियों के हित में एक बेहद महत्वपूर्ण और क्रांतिकारी प्रस्ताव पेश किया है। सेबी द्वारा जारी एक नए कंसल्टेशन पेपर (परामर्श पत्र) के अनुसार, अब नियोक्ताओं (Employers/कंपनियों) को यह अनुमति देने का प्रस्ताव है कि वे अपने कर्मचारियों की लिखित सहमति से उनकी सैलरी का एक हिस्सा सीधे म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) स्कीमों में निवेश कर सकें।

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सरल शब्दों में कहें तो जैसे हर महीने आपकी सैलरी से पीएफ (PF) कटता है, वैसे ही अब आप अपनी मर्जी से सैलरी से म्यूचुअल फंड एसआईपी (SIP) कटवाने का विकल्प चुन सकेंगे।

बदलेगा पुराना नियम: थर्ड-पार्टी पेमेंट को मिलेगी हरी झंडी

वर्तमान नियमों (Regulatory Framework) के अनुसार, म्यूचुअल फंड में निवेश के लिए होने वाला सारा भुगतान सीधे निवेशक के अपने रजिस्टर्ड बैंक खाते से ही होना अनिवार्य है। किसी तीसरे पक्ष (Third-Party) के खाते से भुगतान स्वीकार नहीं किया जाता है।

नया बदलाव: उद्योग जगत से मिले फीडबैक के बाद, सेबी ने अब कुछ निश्चित और विशिष्ट परिस्थितियों में थर्ड-पार्टी पेमेंट की अनुमति देने का मन बनाया है। इसके तहत कंपनियां (नियोक्ता) अपने कर्मचारियों की ओर से सैलरी डिडक्शन (वेतन कटौती) के जरिए एकमुश्त एकीकृत भुगतान म्यूचुअल फंड कंपनियों (AMCs) को कर सकेंगी।

सुरक्षा और PMLA नियमों का रखा जाएगा पूरा ध्यान

सेबी ने स्पष्ट किया है कि इस प्रक्रिया में निवेशकों के हितों की सुरक्षा और धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA – Prevention of Money Laundering Act) के प्रावधानों का कड़ाई से अनुपालन किया जाएगा। नियामक का उद्देश्य एक ऐसा संतुलित दृष्टिकोण अपनाना है, जो वास्तविक मामलों में आम जनता के लिए निवेश को बेहद आसान और ऑटोमैटिक बना दे, लेकिन साथ ही इसके किसी भी संभावित दुरुपयोग को रोकने के लिए मजबूत सुरक्षा दीवार भी खड़ी करे।

म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर्स और निवेशकों के लिए भी 2 बड़े प्रस्ताव:

1. कमीशन के बदले मिलेंगी म्यूचुअल फंड यूनिट्स (MF Units)

सेबी ने तृतीय-पक्ष भुगतान से संबंधित एक और अनोखा सुझाव दिया है। इसके तहत एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMCs) द्वारा म्यूचुअल फंड वितरकों (MFDs) को दिए जाने वाले समय-समय के नकद कमीशन के बजाय, म्यूचुअल फंड यूनिट के रूप में भुगतान किया जा सकता है। यह वितरकों के लिए दीर्घकालिक बचत और अनुशासित निवेश का एक सुविधाजनक और सुगम जरिया बनेगा।

2. रिटर्न का एक हिस्सा सीधे सामाजिक कार्यों में दान करने का विकल्प

सेबी ने निवेशकों को यह अनोखी सुविधा देने का भी प्रस्ताव रखा है कि वे चाहें तो अपनी निवेश राशि या अपनी योजना से मिलने वाले रिटर्न (मुनाफे) का एक निश्चित हिस्सा सीधे सामाजिक कार्यों (Social Causes) में दान कर सकें। इसके लिए एक विनियमित और पूरी तरह पारदर्शी रूपरेखा तैयार की जाएगी ताकि चैरिटी करने वाले निवेशकों को सुरक्षा मिल सके।

जनता और एक्सपर्ट्स 10 जून तक दे सकते हैं सुझाव

सेबी ने इस कंसल्टेशन पेपर को सार्वजनिक कर दिया है। इस पर बाजार विशेषज्ञों, कंपनियों और आम निवेशकों से 10 जून, 2026 तक सुझाव और आपत्तियां मांगी गई हैं। इसके बाद इन सुझावों की समीक्षा की जाएगी और अंतिम नियमों को लागू करने की तारीख घोषित की जाएगी।

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