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Flex-Fuel Vehicles: पेट्रोल-डीजल की छुट्टी करने से पहले ऑटो कंपनियों ने सरकार के सामने रखी बड़ी शर्त; ‘जीएसटी और एथेनॉल की कीमत कम करो, तभी बिकेंगी गाड़ियां

Flex-Fuel Vehicles: पेट्रोल-डीजल की छुट्टी करने से पहले ऑटो कंपनियों ने सरकार के सामने रखी बड़ी शर्त; 'जीएसटी और एथेनॉल की कीमत कम करो, तभी बिकेंगी गाड़ियां

Flex-Fuel Vehicles: पेट्रोल-डीजल की छुट्टी करने से पहले ऑटो कंपनियों ने सरकार के सामने रखी बड़ी शर्त; 'जीएसटी और एथेनॉल की कीमत कम करो, तभी बिकेंगी गाड़ियां

नई दिल्ली:Flex-Fuel Vehicles: पेट्रोल-डीजल की छुट्टी करने से पहले ऑटो कंपनियों ने सरकार के सामने रखी बड़ी शर्त; ‘जीएसटी और एथेनॉल की कीमत कम करो, तभी बिकेंगी गाड़ियां। गन्ने के रस और मक्के से बनने वाले पर्यावरण-अनुकूल एथेनॉल ईंधन से देश की गाड़ियों को दौड़ाने के सरकार के सपने को ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री से बड़ी चुनौती मिली है। मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स और हीरो मोटोकॉर्प जैसी दिग्गज कंपनियों का स्पष्ट कहना है कि जब तक E85 और E100 जैसे हाई-एथेनॉल ईंधन पेट्रोल के मुकाबले काफी सस्ते नहीं होंगे और इन गाड़ियों पर GST (वस्तु एवं सेवा कर) में भारी छूट नहीं मिलेगी, तब तक आम ग्राहक इन नई फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों को खरीदने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाएंगे।

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पेट्रोलियम मंत्रालय, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों और सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चर्स (SIAM) के बीच हुई हालिया उच्च स्तरीय बैठकों में वाहन निर्माताओं ने साफ कर दिया है कि सिर्फ ग्रीन तकनीक बदल देने से शोरूम में गाड़ियां नहीं बिकने वालीं।

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तकनीक बदलने से बढ़ेगी गाड़ियों की कीमत; GST में कटौती की मांग

शुद्ध एथेनॉल (E100) का इस्तेमाल आम इंजनों में नहीं हो सकता। इसके लिए गाड़ियों के इंजन, फ्यूल इंजेक्टर्स और पूरे फ्यूल सप्लाई सिस्टम में बड़े और महंगे तकनीकी बदलाव करने होंगे, जिससे वाहनों की उत्पादन लागत (Manufacturing Cost) बढ़ जाएगी।

टैक्स कम करने पर हिचक रही सरकार: इस अतिरिक्त आर्थिक बोझ को कम करने के लिए ऑटो इंडस्ट्री ने गाड़ियों पर लगने वाले वर्तमान भारी-भरकम टैक्स (18% से 40% तक GST) को कम करने की मांग की है। हालांकि, सरकार फिलहाल कारों पर टैक्स घटाने से कतरा रही है, क्योंकि ऐसा करने से ये गाड़ियां इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs पर मात्र 5% GST है) की सीधी टक्कर में आ जाएंगी। हालांकि, टू-व्हीलर (मोटरसाइकिल-स्कूटर) सेगमेंट को नीतिगत राहत की ज्यादा उम्मीद है।

फ्लेक्स-फ्यूल पर इतना जोर क्यों दे रही सरकार?

सरकार का फ्लेक्स-फ्यूल पर इतना आक्रामक रुख देश की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) से जुड़ा है।

भारतीय कंपनियां तैयार, लेकिन पर्यावरण की चुनौती भी बरकरार

भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने हाई-एथेनॉल पेट्रोल के लिए नए तकनीकी मानक जारी कर दिए हैं। मारुति सुजुकी, टोयोटा, बजाज और होंडा जैसी कंपनियों ने अपने फ्लेक्स-फ्यूल प्रोटोटाइप दुनिया के सामने पेश कर दिए हैं। देश में एथेनॉल की उत्पादन क्षमता भी तेजी से बढ़कर 20 अरब लीटर के करीब पहुंच चुकी है, जबकि मौजूदा मांग केवल 11 अरब लीटर के आसपास है।

लेकिन इस राह में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि गन्ने से एथेनॉल बनाने में पानी की भारी खपत होती है। ऐसे में नीति आयोग के विशेषज्ञों का सुझाव है कि पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने के लिए अब कृषि कचरे और पराली (सेकंड जनरेशन एथेनॉल) का इस्तेमाल बढ़ाना होगा।

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