Thursday, May 7, 2026
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धर्मांतरण : घर वापसी को आतुर आदित्य , मां को वाट्सएप मे दिया मेसेज

कानपुर। मतांतरण कराने वाले सिंडीकेट के चंगुल में फंसकर अब्दुल कादिर बने आदित्य गुप्ता का मन बदल गया है। बुधवार दोपहर उसने अपनी मां के वाट्सएप स्टेटस पर हिंदू मत में वापसी की घोषणा की।

उसके मन में यह बड़ा परिवर्तन काउंसिलिंग के बाद आया है, जिसका प्रबंध एक सुरक्षा एजेंसी की ओर से किया गया था। काउंसलिंग में ऐसे विशेषज्ञ को शामिल किया गया था, जो दोनों मतों का जानकार था। ब्रेनवाश करते समय आदित्य के मन में भरी गई गलत धारणाओं का सच बताकर उसके मन को परिवर्तित कर दिया।

आदित्य के पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक, बुधवार सुबह एक सुरक्षा एजेंसी के कुछ अधिकारी उनके घर आए थे। उनके साथ काउंसलर भी थे। उन्होंने आदित्य से लगभग दो घंटे तक पूछताछ की। विशेषज्ञ ने उससे मुस्लिम मत पर तमाम बातें की।

पता चला कि मतांतरण के लिए तैयार करने के लिए तमाम गलत तथ्यों को उसके दिमाग में भरा गया था।
विशेषज्ञ ने उन प्वाइंटों को पकड़ा और बिंदुवार उसकी व्याख्या कर मतांतरण के लिए बोले झूठ को बताया। सुरक्षा एजेंसियों ने उसे यह भी चेतावनी दी कि वह और उसके साथ सभी पुलिस और अन्य एजेंसियों की निगाह में हैं, जरा सी गड़बड़ी पर कार्रवाई भी हो सकती है।

टीम के जाने के बाद आदित्य के व्यवहार में तेजी से बदलाव दिखा। उसने लंबे-लंबे हो चुके बालों को कटवाया। लंबे समय से वह कोल्ड ड्रिंक नहीं पी रहा था, क्योंकि उसे इसका प्रयोग हराम बताया गया था, मगर उसने खुद कोल्ड ड्रिंक मंगाकर पीया।

दोपहर बाद उसने मां के वाट्सएप स्टेटस पर वापसी की घोषणा की। लिखा…प्लीज डू नॉट बैड आदित्य, आदित्य सेल्फ लीव मुस्लिम, आदित्य लाइक हिंदू लाइफ ओनली, आदित्य नीड जॉब वर्क ओनली। स्टॉप फ्रेंड्स मुस्लिम। इस स्टेटस को पढ़कर उसके घर में खुशी की लहर दौड़ गई।

एटीएस ने बढ़ाई कानपुर में सरगर्मी, सिंडीकेट लापता

मतांतरण मामले में एटीएस की जांच में सामने आया है कि कानपुर में भी सिंडीकेट सक्रिय था। ऐसे में एटीएस की लखनऊ की टीम ने डेरा डाल दिया है। हालांकि, जब से यह मामला सामने आया है सिंडीकेट के सदस्य भूमिगत हो गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस गिरोह से जुड़े लगभग दर्जन भर लोगों की एटीएस को तलाश है, मगर वह सभी फरार हैं। बुधवार को भी एटीएस ने चमनगंज, बाबूपुरवा और जूही में सक्रिय ऐसे लोगों की तलाश में रेकी की, मगर उन्हेंं सफलता नहीं मिली। एटीएफ वासिफ को भी तलाश रही है, मगर अब वह अपने घर पर नहीं है।

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम