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दुबारा लगी याचिका तो अधिकारी से वसूलेगें खर्च

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जबलपुर। हाईकोर्ट ने सरकारी कार्यप्रणाली को सख्त चेतावनी दी है कि कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया गया और याचिकाकर्ता को दोबारा याचिका दायर करनी पड़ी, तो दोनों केस का खर्च संबंधित अधिकारी से वसूला जाएगा। न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर की एकलपीठ ने पूर्व आदेश का पालन करने के लिए 3 माह का समय दिया है।
अवमानना याचिकाकर्ता छतरपुर जिला निवासी कुंजीलाल बसोर की ओर से अधिवक्ता ब्रह्मानंद पांडे ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ता के पिता बक्सवाहा तहसील में सहायक अध्यापक थे। उनकी नियुक्ति शिक्षाकर्मी के रूप में हुई, लेकिन बाद में उनका संविलियन अध्यापक संवर्ग में कर दिया गया। याचिकाकर्ता के पिता की बीमारी से मृत्यु हो गई। इसके चलते याचिकाकर्ता व उसके परिवार के समक्ष उदर-पोषण का संकट आ गया। उसने विभाग में अनुकंपा नियुक्ति का आवेदन दिया, लेकिन उसे नियुक्ति नहीं दी गई। जिसके खिलाफ याचिका पर हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए दिए अभ्यावेदन पर विधि अनुसार निर्णय लेने को कहा। लेकिन अधिकारियों ने इसका पालन नहीं किया। इस पर यह अवमानना याचिका दायर की गई। उन्होंने तर्क दिया कि इस वजह से याचिकाकर्ता के परिवार के सामने फाकों की नौबद आ गई है। अंतिम सुनवाई के बाद कोर्ट ने शिक्षा विभाग के संबंधित अधिकारियों को चेतावनी देते हुए तीन माह के अंदर कोर्ट के पूर्व आदेश का पालन करने का निर्देश दिया।

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