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दावेदार का दावा हमारी तो सेटिंग हो गई

जबलपुर,यभाप्र। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। कांग्रेस और भाजपा ने बिसात बिछ चुकी है। प्रत्याशी चयन को लेकर बैठकों का दौर भी शुरू हो चुका है। इसी बीच कांग्रेस में टिकट के दावेदारों ने यह कहना शुरू कर दिया है कि उनकी तो ऊपर तक सेब्ंिग हो चुकी है। हमारी तो टिकट पक्की है।

निजी एजेंसियों से कराए गए सर्वे के बाद सीटों को लेकर मंथन शुरु कर दिया है, मंथन के बाद पहले उन सीटों की घोषणा होगी जहां से वर्तमान में कांग्रेस के विधायक है, इसके बाद उन सीटों पर विचार होगा, जिसमें पिछले बार कम वोट से कांग्रेस के प्रत्याशी हारे है. कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी की बैठकें लगातार जारी हैं। पिछले सप्ताह हुई दो राउंड की चर्चा के बाद सोमवार को चार घंटे तक चली बैठक में सिंगल नामों को लेकर सहमति बनी है। इन नामों में अधिकांश सिटिंग एमएलए के नाम शामिल हैं। इसके साथ ही 2013 के विधानसभा चुनाव में तीन हजार से कम वोटों से हारने वाले प्रत्याशियों के नाम को भी हरी झंडी मिलने की संभावना है।

इन दोनों ही क्राइटेरिया के अलावा सर्वे के आधार पर भी उम्मीदवारी का फैसला टिका है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी गुजरात और कर्नाटक के पैटर्न पर मध्यप्रदेश में भी टिकट बांटना चाहते हैं। इन दोनों राज्यों में सर्वे के आधार पर टिकट बांटने से पार्टी को लाभ हुआ था। 16 या 17 अक्टूबर तक कांग्रेस की पहली सूची जारी होने की संभावना है। इन संभावनाओं को देखते हुए दावेदारों में होड़ मची है।

जबलपुर की आठ विधानसभा सीटों से चुनाव लड़ऩे के लिए तैयार दावेदारों की धड़कनें भी तेज हो गई है, जिसे छिपाने के लिए वे नए नये शिगूफे भी छोड़ रहे हैं। , और कह रहे हैं कि चिंता की कोई बात नहीं अपना तोनाम तय है। दावेदारों की सूची काफी लम्बी है, जिनके मजबूत दावों को देखते हुए पार्टी के नेता भी भ्रमित है क्या करें. यदि जबलपुर की आठ विधानसभा सीटों की बात की जाए तो उत्तर-मध्य विधानसभा जहां से कांग्रेस को लगातार हार का सामना करना पड़ रहा है,

इस सीट पर कांग्रेस के दावेदारों की संख्या सबसे ज्यादा है, जिनके दावे भी बहुत मजबूत है, कुछ तो ऐसे है जिन्होने यह मान ही लिया है कि टिकट उन्हे ही मिलेगा, इसके अलावा केंट का हाल भी कुछ ऐसा है जहां पर हर दिन छोड़ एक दिन नया नाम उभरकर सामने आ रहा है. पूर्व, पश्चिम, पाटन, पनागर व बरगी से प्रत्याशी लगभग फाइनल हो चुके है, जिसपर बैठक के बाद मुहर लगना बाकी है,।

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम

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