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तीन साल बाद भी प्राइवेट स्कूलों की फीस तय हुई, न यूनिफॉर्म अधिनियम बना

जबलपुर। प्रदेश सरकार की घोषणा के तीन साल बाद भी निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक नहीं लगी है। जिम्मेदार अधिकारी निजी स्कूलों में शुल्क निर्धारण, कॉपी-किताब और यूनिफॉर्म के लिए कोई अधिनियम नहीं बना पाए हैं। गौरतलब है कि निजी स्कूलों के लिए अधिनियम का जो प्रारूप तैयार किया गया था। उस पर निजी स्कूल एसोसिएशन और पालक महांसघ ने 10 हजार से अधिक आपत्तियां लगाई थीं। इसका निदान करने में विभागीय अधिकारी नाकाम रहे हैं और मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। निजी स्कूलों की मनमानी रोकने के लिए राज्य शासन की ओर से फीस अधिनियम तैयार किया गया था। इसको अंतिम रूप देने के लिए 25 जुलाई तक आपत्तियां मांगी गई थीं। लेकिन, स्कूल शिक्षा विभाग दावा- आपत्तियां मंगाकर भूल गया है। अब तक कोई कानून जारी नहीं हुआ। दिसंबर से फिर से स्कूलों में एडमिशन के लएि रजिस्ट्रेशन शुरू हो जाएगा। इसके बाद कॉपी-किताब और यूनिफॉर्म की खरीदारी शुरू हो जाएगी। हालांकि निजी स्कूल एसोसिएशन ने 10 फीसदी से अधिक फीस न बढ़ाने एवं तीन साल की ऑडिट रिपोर्ट के साथ 150 दिन पहले आवेदन करने को गलत बताया था। उनका कहना है कि प्रदेश में 40 हजार स्कूलों में से सिर्फ 500 स्कूल को छोड़कर सभी अल्प आर्थिक एवं सामाजिक सहयोग से चलते हैं। ऐसे में ऑडिट करना संभव नहीं है। वहीं फीस ब?ाने वाले प्रारूप में 22 पन्ने का फॉर्म भरने और 21 प्रकार के रजिस्टर का प्रावधान भी गलत है।

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