डेंगू, मलेरिया, स्वाइन फ्लू, चिकनगुनिया और चमकी बुखार से कैसे अलग है कोरोना
Coronavirus : कोरोना वायरस का कहर चरम पर है। देश व दुनिया में लाखों संक्रमित और हजारों मौतें इस बात की तस्दीक करती हैं कि यह महामारी पूरी मानवता के लिए घातक है। समय सबकी कठिन परीक्षा ले रहा है और ऐसे में खुद को सकुशल रख पाना चुनौती से कम नहीं है। जब हम सकुशल रहने की बात करते हैं तो यह जानना जरूरी हो जाता है कि कोरोना का अभी तक कोई इलाज नहीं खोजा जा सका है, लिहाजा बचाव ही उपाय है। बीते कुछ वर्षों में हमने डेंगू, मलेरिया, स्वाइन फ्लू, चिकनगुनिया और चमकी बुखार (इंसेफेलाइटिस) जैसे जानलेवा बीमारियों को पनपते और दहशत मचाते देखा है। कोरोना भी इसी क्रम में एक खतरनाक रोग है। इस संबंध में हमने एक फिजिशयन और पूर्व चिकित्सा अधिकारी डॉ. महावीर खंडेलवाल से बात की और जाना कि इन सबके लक्षण और असर में क्या अंतर है। आइये संक्षेप में समझें।
जबसे विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO ने कोरेाना को वैश्विक महामारी घोषित किया तब से एक शब्द अधिक चर्चा में आ रहा है, वह है पेनडेमिक। इससे पहले लोगों ने महामारी के लिए एपिडेमिक शब्द सुना था। लेकिन एक पेनडेमिक और एपिडेमिक में क्या अंतर होता है, आइये समझते हैं।
इंडेमिक Indemic : यानी एक ऐसी छोटी बीमारी जो कि किसी एक भौगोलिक क्षेत्र विशेष तक ही सीमित होती है। जैसे-चंबल का इलाका, मालवा, निमाड़, बुंदेलखंड, हिमालय क्षेत्र आदि। उस समय वह उस एक क्षेत्र के ही लोगों को चपेट में लेती है और इसके आगे नहीं फैलती। बिहार के मुजफ्फरपुर में पिछले साल फैला चमकी बुखार (इंसेफेलाइटिस) इंडेमिक ही था। इसने एक ही क्षेत्र में सैकड़ों बच्चों की जान ले ली थी।
एपिडेमिक Epidemic: यह भी महामारी का एक प्रकार है। इसका अर्थ ऐसी बीमारी जो किसी बड़े एरिया में फैलती है। जैसे भारत, श्रीलंका, जापान, अमेरिका या कोई भी एक बड़ा देश या बड़ा इलाका। देश में वर्ष 2007 में चिकनगुनिया का कहर बरपा था। तब कई राज्यों में चिकनगुनिया के मरीजों की भरमार हो गई थी। इसके मामले बारिश के दिनों में अधिक सामने आते हैं। पोलियो, मलेरिया व डेंगू को भारत सरकार ने महामारी घोषित किया है। इनके उन्मूलन के लिए वर्षों तक प्रयास किए गए। पोलियो तो अब खत्म हो चुका लेकिन मलेरिया व डेंगू अभी भी कायम हैं।
पेनडेमिक Pandemic: यह किसी वैश्विक महामारी के संदर्भ में उपयोग किया जाने वाला शब्द है। इसकी मृत्यु दर बहुत अधिक होती है। स्वाइन फ्लू इसका एक बड़ा उदाहरण रहा है। एचआईवी पॉजीटिव यानी एड्स भी वैश्विक महामारी है। यह भी वायरस ही है लेकिन इस वायरस से रोग फैलने का ट्रांसमिशन मोड कुछ अलग होता है।
अब बात कोरोना की
जहां तक कोरोना वायरस की बात है, यह निश्चित ही एक वैश्विक महामारी है जो कई देशों को एक साथ चपेट में ले रहा है। यह वायरस पहली ही बार सामने आया है। इसके मुख्य लक्षण सर्दी, जुकाम व खांसी बताए जा रहे हैं लेकिन सर्दी, जुकाम जैसी साधारण बात भी आज से 500 साल पहले पेनडेमिक से कम नहीं थी। बाद में यह घातक होती गई। आज यह कोरेाना के रूप में सामने है।
इन बातों को ना भूलें
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कोरोना का वायरस हवा में नहीं रहता, यह सरफेस पर रहता है। इसके विपरीत एचवन एनवन स्वाइन फ्लू का वायरस सरफेस पर नहीं टिकता, वह हवा में जीवित रहता है।
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क्वारेनटाइन करके ही कोरेाना से बचा सकता है क्योंकि एक बार इसकी चपेट में आ गए तो उसके बाद इसका निश्चित इलाज अभी तय नहीं है। ऐसे में आपकी इम्युनिटी ही आपको बचाएगी।
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टेबल, कपड़े, हैंडल, सोफा, दरवाजा, किसी चीज का पैकेट, मोबाइल, कम्प्यूटर, लैपटॉप, घड़ी, कुर्सी, पलंग, टीवी, रिमोट, स्विच बोर्ड, रूमाल, पेन, पर्दा, तकिया, ईयर फोन, चार्जर आदि कई दैनिक उपयोग की चीजें हैं, जिनके सरफेस पर कोरोना वायरस टिक सकता है। ऐसे में हाथ धोते रहना ही श्रेष्ठ उपाय है।
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जो लोग इलाज कराने की बजाय भाग रहे हैं, वे समाज में जाने कितने बेगुनाह लोगों का मर्डर कर रहे हैं।
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लोगों से कम मिलें, दूर से बात करें, हाथ ना मिलाएं। मृत शरीर को जलाना ही उपयुक्त है। कोरेाना मृत शरीर पर जीवित रहता है, जलाने से वह नष्ट हो जाता है।

