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झारखंड के दंपति का दावा- उनकी बेटी है पाक से लौटी गीता

काटाशोल। झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के घाटशिला के चाकुलिया काटाशोल गांव की रहने वाले अरुण पाल और किशोरी पाल का दावा है कि पाकिस्तान से लौटी गीता उनकी बेटी है. अरुण पाल ने बताया कि जब उनकी बेटी 9 साल की थी, तब जमशेदपुर के सालगाझुरी रेलवे स्टेशन से खो गई थी. बेटी के लापता हुए अब तकरीबन 23-24 साल हो गए हैं.

अरुण पाल ने बताया कि शुरुआत में सात साल तक अपनी बेटी की खोजबीन की थी, लेकिन जब नहीं मिली तो वे थक हार कर छोड़ दिया.  गीता को साल 2015 में पाकिस्तान से भारत लाया गया था. भारत आने के बाद से गीता इंदौर के मूक-बधिरों के लिए चलाई जा रही रही संस्था में रह रही है.

अरुण पाल ने बताया कि उनके पास अपनी बेटी की कोई तस्वीर भी नहीं है. बेटी के लापता होने की सूचना भी उन्होंने किसी थाना में दर्ज नहीं करायी थी. अरुण पाल की दो बेटी और एक बेटा है इस बात का जिक्र ग्रामीण भी करते हैं.

अरुण पाल की बड़ी बेटी गीता के बारे में गांव के लोगों ने बताया कि वह टूटा-फूटा बोल पाती थी, लेकिन गांव के सारे लोग उसे गूंगी बोल कर ही बुलाते थे.


पाक से लौटी गीता से मिलने के अरुण पाल और किशोरी पाल बेताब हैं, लेकिन रुपये नहीं होने के कारण वे दिल्ली नहीं जा सकते हैं. उन्होंने पत्र के माध्यम से सुषमा स्वराज से गीता को अपनी बेटी होने की बात भी कही है. जिस पर दिल्ली से उसके दिए गए फोन नंबर पर फोन आया और कहा कि पहले डीएनए टेस्ट कराना होगा.

अरुण पाल कहते हैं कि वे डीएनए टेस्ट के लिए तैयार हैं. अगर खोयी हुई गीता उसकी ही बेटी है, तो वे अवश्य बेटी को घर लाएंगे. बेटी के खोने का गम उन्हें आजतक है.

गीता के पिता होने का दावा कर रहे अरुण पाल ने कहा कि जब गीता खोई थी तब वे कुम्हार का काम करत थे और बर्तन के बर्तन बनाते थे. मिट्टी के हड्डी को देखकर शायद कुछ गीता को याद आ पाए. उन्होंने बताया कि उन्होंने मिट्टी के हड्डी के पास तस्वीर खिंचवा कर दिल्ली भेजी है.

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम

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