Healthफिटनेस फंडामध्यप्रदेश

जानलेवा बीमारी डिप्थीरिया से बचाने के लिए 10 व 16 की उम्र में भी लगेगा टीका

 भोपाल। पांच साल की उम्र तक होने वाली जानलेवा बीमारी गलघोटू (डिप्थीरिया) ने अपनी उम्र बढ़ा ली है। अब 18 साल तक के किशोरों में भी यह बीमारी मिल रही है। इस रोग की चपेट में आने वाले 95 फीसदी मरीजों की मौत हो जाती है।

लिहाजा डिप्थीरिया पर पूर्णत: नियंत्रण के लिए अगले साल से मध्यप्रदेश में 10 और 16 साल की उम्र में पुन: डिप्थीरिया का टीका टिटनेस के साथ लगाया जाएगा।

इसके बाद जीवन भर के लिए टिटनेस और डिप्थीरिया से बचाव हो जाएगा।राज्य टीकाकरण अधिकारी डॉ. संतोष शुक्ला ने बताया कि गलघोटू से बचाव के लिए पहले डीपीटी (डिप्थीरियाकाली खांसी व टिटनेस) का टीका डेढ़, ढाई व साढ़े तीन महीने की उम्र में लगाया जाता था।

vaccine demo

अब इसे पैंटावैलेंट के साथ लगाया जाता है। इसके बाद 16-24 महीने व 5-6 साल की उम्र में डीपीटी बूस्टर टीका लगाया जाता है। दिक्कत यह है कि करीब 70 फीसदी बच्चों को बूस्टर टीका नहीं लग पा रहा है। इस कारण वे बीमारी से पूरी तरह से सुरक्षित नहीं हो पाते। दूसरा, 5-6 साल की उम्र के बच्चों को होने वाली बीमारी की चपेट में अब 18 साल तक किशोर भी आ रहे हैं।

लिहाजा 10 और 16 साल की उम्र में पहले से लगाए जा रहे टिटनेस के बूस्टर टीके के साथ डिप्थीरिया को जोड़कर (टीडी) टीका अगले साल जनवरी-फरवरी से शुरू करने की तैयारी है। उन्होंने कहा कि डिप्थीरिया के मरीज को बचाव के लिए एंटी डिप्थीरिक सीरम (एडीएस) पहले लगाया जाता था, पर दवा कंपनियों ने अब इसे बनाना ही बंद कर दिया, जिससे बीमारी ठीक नहीं हो पाती।

इस तरह खतरनाक है डिप्थीरिया

डॉ. शुक्ला ने बताया कि यह बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी है। पीड़ित के गले में दर्द, तेज बुखार व मुंह में सफेद झिल्ली बन जाती है। गले में सूजन से सांस नली दब जाती है। दिल पर भी असर होता है, जिससे बच्चे की मौत हो जाती है।

हर महीने चार-पांच केस आते हैें

हमीदिया अस्पताल में शिशु रोग विभाग की प्रमुख डॉ. ज्योत्सना श्रीवास्तव ने बताया कि अस्पताल में हर महीने इस बीमारी से पीड़ित चार-पांच बच्चे पहुंचते हैं। बीमारी के बढ़ जाने पर अधिकतर बच्चों को बचा पाना मुश्किल होता है। निजी क्षेत्र में पहले से यह टीका पांच साल से बड़े बच्चों को लगाया जा रहा है।

Leave a Reply

Back to top button