‘जय श्री राम’ के नारे पर महाराष्‍ट्र की सांसद ने इशारों में BJP पर साधा निशाना

नई दिल्‍ली। संसद भवन में सांसदों के शपथ लेने के दौरान ‘जय श्री राम’ के नारे का कोई मतलब नहीं है पश्चिम बंगाल में ‘जय श्रीराम’ के नारे को लेकर जारी घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है. जबकि इस नारे की गूंज संसद भवन में भी सुनाई दे रही है. हालांकि संसद में ‘जय श्री राम’ के नारे लगाने पर अमरावती (महाराष्ट्र) से निर्दलीय सांसद नवनीत कौर राणा ने इशारों-इशारों में भाजपा पर निशाना साधा है. उन्‍होंने कहा, ‘ संसद भवन में सांसदों के शपथ लेने के दौरान ‘जय श्री राम’ के नारे का कोई मतलब नहीं है. यह सही जगह नहीं और इसके लिए मंदिर हैं. सभी देवता समान हैं लेकिन किसी को लक्षित करना और उसका नाम लेना गलत है.’

एक्ट्रेस से अब नेता
नवनीत के पति रवि राणा अमरावती जिले के बडनेरा से विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं. पति की तरह उन्होंने भी पिछले लोकसभा चुनाव में राजनीति में डेब्‍यू किया. 2014 लोकसभा चुनाव में वह अमरावती से एनसीपी के टिकट पर चुनावी मैदान में उतरी थीं. हालांकि, शिवसेना के आनंदराव अडसूल और मोदी लहर के आगे उनकी चुनौती टिक नहीं सकी. वह सवा लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से चुनाव हार गई थीं.

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बदल दिया इतिहास
छोटे और बड़े परदे को छोड़कर नवनीत कौर राणा ने इस बार महाराष्ट्र की अमरावती संसदीय सीट से अपनी किस्मत आजमाई और निर्दलीय प्रत्‍यासी के तौर पर सांसद बनकर दम दिखाया है. सच कहा जाए तो शिवसेना के मजबूत गढ़ को ढहाने में वह सफल रही हैं. उन्होंने शिवसेना के सांसद अडसूल आनंदराव विठोबा को 36951 वोटों के अंतर से करारी शिकस्त दी. इस चुनाव में नवनीत रवि राणा को 510947 वोट हासिल हुए तो शिवसेना के अडसूल आनंदराव विठोबा को 473996 वोट मिले.

कौन हैं नवनीत
नवनीत कौर का जन्म 3 जनवरी 1986 को मुंबई में हुआ. जबकि अमरावती जिले के बडनेरा से विधायक रवि राणा से उनकी शादी हुई है. कौरे ने ज्यादातर तेलुगु फिल्मों में काम किया. नवनीत के माता-पिता पंजाबी मूल के हैं. जबकि उनके पिता आर्मी में अफसर थे. उन्‍होंने 12वीं पास करने के बाद पढ़ाई छोड़ मॉडल के तौर पर काम करना शुरू कर दिया. जबकि नवनीत ने कन्नड़ फिल्म ‘दर्शन’ से अपने फिल्मी सफर की शुरुआत की. इसके अलावा वह तेलुगु फिल्म सीनू, वसंथी और लक्ष्मी में भी एक्टिंग कर चुकी हैं. वहीं मलयालम फिल्म ‘लव इन सिंगापुर’ के अलावा पंजाबी फिल्म ‘लड़ गए पेंच’ में भी वह नजर आई हैं.

जय श्री राम के नारे को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका
कलकत्ता हाईकोर्ट में जय श्री राम का नारा लगाना मौलिक अधिकार घोषित किया जाए, इस संबंध में याचिका दायर की गई है. याचिका में मांग की गई कि पश्चिम बंगाल में जय श्री राम का नारा लगाने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जा रही है. ऐसे में कोर्ट को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए. हालांकि कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई को स्‍थगित कर दिया और चार सप्ताह बाद सुनवाई के लिए रखा.

होना चाहिए मौलिक अधिकार
मुख्य न्यायाधीश टीबीएन राधाकृष्‍णन की अध्यक्षता वाली खंडपीट के सामने याचिका दायर करते हुए वकील पार्थ घोष ने कहा कि जय श्री राम का नारा लगाना नागरिकों का मौलिक अधिकार घोषित होना चाहिए. खबरों का हवाला देते हुए घोष ने कोर्ट से कहा कि भगवान राम का नारा लगाना या फिर उनकी पूजा अर्चना करने वालों को खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए. यह कोई कानून नहीं है. ऐसे में कोर्ट को इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए और इस संबंध में दिशा निर्देश जारी करने चाहिए. हालांकि कोर्ट ने मामले में तत्काल कार्रवाई से इनकार करते हुए मामले की सुनवाई चार सप्ताह के लिए टाल दी है.

ममता के सामने लगे थे श्रीराम के नारे
गौरतलब है कि कुछ समय पहले ही बीजेपी कार्यकर्ताओं ने तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के काफिले को रोकने का प्रयास करते हुए जय श्री राम के नारे लगाते हुए विरोध जताया था. विरोध प्रदर्शन को लेकर सीएम ममता ने सख्त कार्रवाई का आदेश दिया था. इसके बाद ममता के विरोध में देश भर में प्रदर्शन के दौर चले. उन्हें जय श्रीराम लिखे हुए पोस्टकार्ड और वाराणसी के संतों ने रामचरित मानस की प्रतियां भी डाक के द्वारा भेजी थीं.

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