जन्म पत्रिका नहीं, ये कुंडली मिलाएं, शादी के बाद नहीं होगी ये खतरनाक बीमारियां
इंदौर। शादी से पहले पत्रिका मिलाने के साथ जोड़ों का ब्लड ग्रुप और मेडिकल हिस्ट्री मैच (मिलान) कर लें तो डायबिटीज, कार्डियक, थैलेसीमिया जैसी कई अनुवांशिक बीमारियों को रोका या कम किया जा सकता है।
आज भी हमारे यहां अधिकांश लोग इस बात पर ध्यान नहीं देते हैं। ऐसे लोगों को जागरूक करने के लिए डॉ. शिल्पा जोग ने 2005 में ‘मेडिकल कुंडली’ की शुरुआत की। इसमें वे लोगों को वैज्ञानिक तरीके से पत्रिका मिलाने के लिए आग्रह कर रही हैं।
डॉ. जोग ने मेडिकल बायोकेमिस्ट्री में पीएचडी किया है। जेनेटिक्स की जानकार होने से वे जेनेटिक बीमारियों के बारे में लोगों को बताती हैं। डॉ. जोग के मुताबिक 1988 में उन्होंने लैब खोली थी। कुछ लोग कुंडली लेकर तो कुछ सगोत्र के लिए ब्लड ग्रुप मैच कराने को कहते थे। उन्हें इतनी भी जानकारी नहीं थी कि इसके लिए ब्लड सैंपल देना होता है। लोगों में ब्लड ग्रुप को लेकर कई गलतफहमी हैं। उन्हें समझाना शुरू किया। आने वालों को मेडिकल हिस्ट्री देखने की सलाह दी। वे लोगों को जागरूक करने के लिए निशुल्क कार्यशालाएं आयोजित करती हैं।
जल्द निर्णय लेने वाला होता है मांगलिक
डॉ. जोग के मुताबिक लोगों को अचानक परंपराएं खत्म करने का कहने पर वे नहीं मानेंगे। उनके लिए बीच का रास्ता निकालना होता है, ताकि उनकी मान्यताएं भी बनी रहें और वे वैज्ञानिक तरीके से बातें समझें। इसके लिए पत्रिका के बारे में भी जानना शुरू किया। उसकी एक-एक चीज को वैज्ञानिक ढंग से समझाना शुरू किया। लोग सिर्फ मांगलिक देखकर शादी नहीं करते, जबकि वैज्ञानिक रूप से देखें तो मांगलिक व्यक्ति का एनर्जी लेवल ज्यादा होने से वह आत्मविश्वास से भरपूर और शीघ्र निर्णय लेने वाला होता है।
आज भी पत्रिका मिलान सब कुछ
सगोत्र में विवाह न होने के पीछे भी वैज्ञानिक कारण हैं। आज की युवा पीढ़ी तो वैज्ञानिक तरीके से समझाने से समझ जाती है, लेकिन अभिभावकों के लिए आज भी पत्रिका मिलान ही सब कुछ है। ऐसे में उनके इस विश्वास को भी खत्म नहीं कर सकते। मेडिकल कुंडली के नाम से वे भी समझने का प्रयास करते हैं। कुंडली के साथ दोनों परिवारों की मेडिकल हिस्ट्री देख लें कि एक जैसी बीमारियां दोनों तरफ हैं या नहीं।
काउंसलिंग में यह भी बताया जाता है कि बिना मैचिंग के आपकी शादी हो गई है तो आपको क्या सावधानियां बरतना चाहिए।

