jabalpur

जनेकृविवि: उपलब्धियों से भरपूर रहा 2018

अनेक फसलों की नई किस्में विकसित कर राष्ट्रीय क्षितिज पर चमका कृषि विवि
4 नये महाविद्यालयों एवं खाद्य तकनीकी संस्थान की सौगात

जबलपुर । जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के 15वें कुलपति के रूप में पदभार ग्रहण कर डॉं. प्रदीप कुमार बिसेन का एक वर्ष का कार्यकाल विदा लेता वर्ष 2018 अभूतपूर्व उपलब्धियों से भरपूर रहा। विभिन्न फसलों की नई किस्मों के विकास ने विश्वविद्यालय की गरिमा में राष्ट्रीय स्तर पर चार चांद लगाये। वर्ष भर चलने वाली प्रादेशिक और राष्ट्रीय संगोष्ठियां, किसान मेले और शासकीय व निजी क्षेत्रों की कम्पनियों के साथ हुए एम.ओ.यू. अनुबंध ने इसकी साख को प्रदेष एवं राष्ट्रीयस्तर पर और भी मजबूत किया। मध्यप्रदेश को लगातार पॉंचवीं बार मिले ”कृषि कर्मण अवार्डÓÓ से कृषि विवि के वैज्ञानिकों का अप्रतिम योगदान को मध्यप्रदेश शासन से लेकर कृषि अनुसंधान परिषद नईदिल्ली तक सराहा गया और विकसित की गई उन्नत कृषि तकनीक के चर्चे देशभर में हुए। गत वर्ष ही डॉं. प्रदीप कुमार बिसेन ने नये कुलपति का पदभार ग्रहण किया। वे इसी विवि के छात्र रहे हैं। छत्तीसगढ़ बनने के बाद विष्वविद्यालय का विभाजन हुआ फिर ग्वालियर विष्वविद्यालय बनने से पुन: विभाजन हुआ इतना ही नहीं पशुचिकित्सा एवं विज्ञान विष्वविद्यालय जबलपुर बनने से जनेकृविवि विभाजन की गहरी पीड़ा झेलनी पड़ी। फलस्वरूप 11 महाविद्यालयों से घटकर 5 महाविद्यालयों तक ही जनेकृविवि सिमटकर रह गया। पदभार ग्रहण करते ही कुलपति डॉं. प्रदीप कुमार बिसेन ने विभाजन के दंष को ध्यान में रखते हुये विषेष तरजीह देकर जनेकृविवि के खोये हुये स्वाभिमान को पुनप्र्रतिष्ठित करने के लिये जबलपुर से लेकर भोपाल और दिल्ली तक उच्चाधिकारियों के समक्ष जोरदार तरीके से अपनी बात रखी। फलस्वरूप मात्र एक वर्ष में ही जनेकृविवि को हजारों एकड़ भूमि के साथ 4 नये महाविद्यालयों और राष्ट्रस्तरीय कृषि संस्थानों की सौगात प्राप्त हुई। इस प्रकार वर्तमान में जनेकृविवि के पास पुन: 11 महाविद्यालय स्थापित हो चुके हैं। इससे विवि की प्रतिष्ठा में उत्तरोत्तर उन्नति के साथ ही व्यापक प्रगतिचक्र की गति तीव्रतम हुई है।
विदेशी छोत्रों को मिली सुविधाएं
जनेकृविवि की लगातार बढ़ती लोकप्रियता और गौरव के चलते वर्तमान में विदेशी छात्रों के साथ ही देष के 21 प्रदेशों के सैंकड़ों छात्र-छात्राएं यहा अध्ययनरत् होकर भविष्य के प्रति निश्चिंत हैं। छात्राओं हेतु सुरक्षा के अनेक साधन मुहैया करवाएं गये हैं।
शीघ्र खुलेगें दो नये महाविद्यालय ाव कृषि विज्ञान केन्द्र
दो नये महाविद्यालय- कृषि महाविद्यालय, खुरई 131.93 करोड़ एवं उद्यानिकी महाविद्यालय, रहली -114 करोड़ की लागत से खुल चुके हैं तथा दो महाविद्यालय कृषि महाविद्यालय, पन्ना एवं उद्यानिकी महाविद्यालय, छिन्दवाड़ा शीघ्र खुलेंगे। सिंगरौली में एक एवं दो कृषि विज्ञान केन्द्र सागर व छिन्दवाड़ा में शीघ्र खुलेंगे। विदिशा हेतु प्रक्रिया जारी है।
129 नये पदों का सृजन
95.19 करोड़ की लागत का राष्ट्रीयस्तर का खाद्य प्रौद्योगिकी संस्थान स्वीकृत हो गया है। इसमें 129 पद भरे जायेंगे।
दो नये अनुसंधान केन्द स्वीकृ ता व उच्चस्तरीय आँचलिक खेल परिसर खुलेगें
दो नये अनुसंधान केन्द्र- गन्ना अनुसंधान केन्द्र बोहानी जिला नरसिंहपुर तथा जैविक अनुसंधान संस्थान औरई जिला मण्डला भी स्वीकृत हो गये हैं। 3 करोड़ की लागत से निर्मित उच्चस्तरीय आँचलिक खेल परिसर छात्रों के खेलों हेतु खोले दिया गया है।
सूचना तंत्र हो रहा मजबूत
संचार केन्द्र, केंटीन, सुरक्षा नियंत्रण कक्ष एवं सूचना एवँ जनसंपर्क कार्यालय का निर्माण किया गया है। प्रक्षेत्रों की सड़कों हेतु 3.49 करोड़ स्वीकृत हो चुके हैं।
दीक्षांत समारोह में स्वदेशी परिधान की शुरूआत
विवि के विगत साढ़े पाँच दशकों के इतिहास में यह पहला अवसर था जब महामहिम राज्यपाल तथा कुलाधिपति श्रीमति आनंदी बेन पटेल की अध्यक्षता में दीक्षांत समारोह में पूर्णत: स्वदेशी परिधान का उपयोग किया गया। छात्रों तथा पुरूषों द्वारा पगड़ी (साफा), कुर्ता-पजामा तथा कोटी (बंडी) को धारण किया गया। छात्राओं, महिलाओं तथा स्वयं महामहिम ने भारतीयता की वेशभूषा को धारण कर औपनिवेशवाद के सूचक गाऊन- ड्रेस को तिलांजली दी।
फसलों की उन्नत प्रजातियां हुई विकसित
3 फसलों की 10 उन्नत किस्में/प्रजातियाँ विकसित की गई। सुगंधित धान के विपुल उत्पादन हेतु उन्नत चिन्नौर, उन्नत जीरा-शंकर, तथा धान की जे.आर. 81, जे.आर.बी. 01, जे.आर. 206 किस्मों का विकास किया गया जो प्रदेश में प्रचलित पुरानी किस्मों एम.टी.यू. 1010 एवं आई.आर. 64 को प्रतिस्थापित करेंगी।
मक्का की नई किस्म पूसा जवाहर संकर मक्का 01 तथा जवाहर मक्का 218 एवं अरन्डी की दो नई किस्में जवाहर अरण्डी 4 एवं जवाहर अरण्डी 24 विकसित की गई। सोयाबीन की नई प्रजातियाँ मध्य क्षेत्र के लिये जे.एस. 20-94 एवं उत्तर पूर्वी पहाड़ी क्षेत्र के लिये जे.एस. 20-116 विकसित की गई।

कुलपति डॉं. प्रदीप कुमार बिसेन का कहना  है 

कि मुख्यद्वार किसी भी संस्था का दर्पण होता है, और जनेकृविवि अपने कृषि षिक्षा, अनुसंधान और विस्तार की वजह से देषभर में ख्यात है और देषभर के वैज्ञानिक, छात्र, अभिभावक और कृषकगणों का यहां वर्षभर आगमन होता है। इसलिये सुव्यवस्थित और साफ-सुथरा तथा सुविधाजनक कैम्पस होना बहुत जरूरी है।

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