घर के बाहर मरीज को देखा तो रद्द हो जाएगा पंजीयन

जबलपुर,यभाप्र। स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत समस्त चिकित्सकों पर निजी अस्पताल और निजी नर्सिंग होम में प्रैक्टिस करने पर रोक लगी है। इसके बाद भी शहर के कई डॉक्टर्स न सिर्फ निजी अस्पताल बल्कि निजी र्नसिंग होम में प्रैक्टिस और ऑपरेशन कर रहे हैं, साथ ही खुद के अस्पताल भी संचालित कर रहे हैं। इन चिकित्सकों को केवल जांच सेवा दे रहे हैं। उसके मुख्यालय पर अपने निजी निवास पर ड्यूटी के बाद निजी प्रैक्टिस करने की छूट है। शिकायतों के बाद बनी टीम स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत होने के बाद डॉक्टर्स निजी अस्पताल और नर्सिंग होम में प्रैक्टिस कर रहे हैं। ऐसे चिकित्सकों का डाटा तैयार कराया जा रहा है। अब अब सरकारी अस्पताल के डॉक्टर घर के बाहर मरीज को देखकर दवा का पर्चा नहीं लिख पाएंगे। नर्सिंग होम या निजी दवाखाने में मरीज का उपचार करते पाए गए तो अस्पताल प्रबंधन जांच कराएगा। दोषी मिले तो नोटिस थमाकर सेवा समाप्ति की अनुशंसा की जाएगी। इस तरह की शिकायत बार-बार मिलने के बाद संयुक्त संचालक द्वारा सीएमएचओ को निर्देश दिए गए हैं कि वह एक टीम गठित कर अपने अधीनस्थ संचालित हो रहे निजी अस्पताल, नर्सिंग होम का निरीक्षण कराएं। यदि स्वास्थ्य विभाग का कोई चिकित्सक इन अस्पतालों में प्रैक्टिस, ऑपरेशन करते पाया गया तो उसकी जानकारी 15 दिन में विभाग को भेजें। ये हैं नियम लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा 7 अगस्त 2013 में स्पष्ट उल्लेख किया गया कि स्वास्थ्य विभाग का कोई भी डॉक्टर किसी नर्सिंग होम और निजी अस्पताल में जाकर प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं कर सकता है। यदि विभाग के डॉक्टरों द्वारा निजी अस्पताल में जाकर सेवा दी जा रही है तो यह मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 16 के उपनियम 4 का उल्लंघन होने के कारण अवैधानिक है एवं मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियम 1966 के तहत दंडनीय है। निजी चिकित्सालयों का भी मध्यप्रदेश उपचार गृह राजापोचार संबंधित स्थापना नियम 1997 शेड्यूल 3 नियम 18 खी धारा 6 के प्रावधान अनुसार ऐसे शासकीय चिकित्सकों की जानकारी एवं भुगतान की गई राशि की जानकारी प्राधिकृत पर्यवेक्षक अधिकारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) को लिखित में देना जरूरी है। पत्र व्यवहार- स्वास्थ्य विभाग ने पत्र व्यवहार के माध्यम से अपने अधीनस्थ डॉक्टरों से जानकारी मांगी गई कि उनके द्वारा निजी अस्पताल संचालित किया जा रहा है या वो किसी प्राइवेट अस्पताल में निजी प्रैक्टिस तो नहीं कर रहे हैं। निजी अस्पताल से मांगी जानकारी- स्वास्थ्य विभाग ने जिले में संचालित हाने वाले निजी अस्पतालों से जानकारी मांगी है कि उनके यहां पर कोई सरकारी डॉक्टर प्रैक्टिस तो नहीं कर रहा है। शिकायत के बाद जांचसीए मएचओ ने बताया कि यदि कोई डॉक्टर की शिकायत मिलती है तो पहले पत्र लिखकर स्पष्टीकरण मांगा जाएगा, फिर जांच होगी और यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो आगे की कार्रवाई के लिए जांच भोपाल भेजी जाएगी।








