हरिद्वार। पतंजलि की दवा कोरोनिल को उत्तराखंड आयुष विभाग की तरफ से लाइसेंस जारी किया है। आयुष मंत्रालय ने विभाग से इस बारे में जानकारी मांगी है।
विभाग के लाइसेंसिंग अधिकारी डॉ. यतेंद्र सिंह रावत का कहना है कि दिव्य फार्मेसी के नाम पर 12 जून को लाइसेंस जारी किया गया है।
लाइसेंस में कोरोनिल वटी समेत दो अलग-अलग मात्रा वाली श्वासारी दवा को इम्यूनिटी बूस्टर बताया गया है। अब कंपनी को नोटिस जारी कर पूछा जाएगा कि वह किस आधार पर इम्यूनिटी बूस्टर की दवाओं को कोविड-19 की दवा बता रही है।

पतंजलि की दवा पर आयुष मंत्रालय की गलतफहमी दूर : बालकृष्ण
पतंजलि की दवा के विज्ञापन पर रोक लगाने के मामले पर आचार्य बालकृष्ण का बयान आया है। आचार्य बालकृष्ण पतंजलि योगपीठ के महामंत्री हैं। उन्होंने ट्वीट किया है,
‘केंद्र सरकार आयुर्वेद को प्रोत्साहन देती आई है। पतंजलि की दवा को लेकर आयुष मंत्रालय को जो भी गलतफहमी थी, वह दूर कर दी गई है। पतंजलि ने आयुर्वेदिक दवाओं की जांच (रेंडमाइज्ड प्लेसबो कंट्रोल्ड क्लीनिकल ट्रायल) के सभी आधिकारिक मानकों को सौ प्रतिशत पूरा किया है।
इसकी सभी जानकारी हमने आयुष मंत्रालय को दे दी है, अब कहीं कोई संशय नहीं रह गया है।’
पतंजलि ने कोरोना वायरस की दवा
आपको बता दें कि योग गुरु स्वामी रामदेव ने कोरोना वायरस की दवा कोरोनिल को मंगलवार को बाजार में उतारा और दावा किया कि आयुर्वेद पद्धति से जड़ी-बूटियों के गहन अध्ययन और शोध के बाद बनी यह दवा शत- प्रतिशत मरीजों को फायदा पहुंचा रही है।
यहां पतंजलि योगपीठ में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए बाबा रामदेव ने कहा कि पतंजलि पूरे विश्व में पहला ऐसा आयुर्वेदिक संस्थान है, जिसने जड़ी-बूटियों के गहन अध्ययन और शोध के बाद कोरोना महामारी की दवाई प्रामाणिकता के साथ बाजार में उतारी है ।
उन्होंने कहा कि यह दवाई शत-प्रतिशत मरीजों को फायदा पहुंचा रही है। उन्होंने कहा कि 100 मरीजों पर नियंत्रित क्लिनिकल ट्रायल किया गया, जिसमें तीन दिन के अंदर 69 प्रतिशत और चार दिन के अंदर शत-प्रतिशत मरीज ठीक हो गये और उनकी जांच रिपोर्ट पॉजिटिव से नेगेटिव हो गयी।








