कृषि कानूनों से जुड़े मिथकों को तोड़ने के लिए विज्ञापन पर सरकार ने खर्च किए 8 करोड़ रुपये
बीते साल सितंबर महीने में आए कृषि कानूनों के खिलाफ जारी किसान आंदोलन के बीच सरकार ने इससे जुड़े भ्रम-मिथकों को दूर करने के लिए विज्ञापन पर करीब 8 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।
कृषि मंत्रालय ने शुक्रवार को यह भी दावा किया कि अध्यादेश लागू करने से पहले सभी राज्य सरकारों से भी विचार-विमर्श किया गया था। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, कृषि मंत्रालय ने यह भी दावा किया है कि कृषि कानूनों पर सरकार ने कूटनीतिक माध्यमों से भारतीय प्रवासियों से भी चर्चा की थी। हालांकि, इसपर कोई खर्च नहीं हुआ था क्योंकि ये रोजमर्रा के कूटनीतिक कामों से जुड़े हैं।
केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने यह जानकारी राज्यसभा में कृषि कानूनों को लेकर पूछे गए अलग-अलग सवालों के लिखित जवाब में दी।
कृषि कानूनों के प्रचार अभियान के तहत इससे जुड़े मिथकों को दूर करने के लिए खर्च की गई राशि पर पूछे सवाल के जवाब में कृषि मंत्री ने कहा कि सूचना प्रसारण मंत्रालय के ब्यूरो ऑफ आउटरीच ऐंड कम्यूनिकेशन (BOC) ने सितंबर 2020 से जनवरी 2021 के बीच 7.25 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।