कृषि उत्पादन दुगना करने हेतु प्राकृतिक संसाधनों में समन्वय आवश्यक- डॉ. पी.के. मिश्रा
जबलपुर । जवाहरलाल नेहरु कृषि विश्वविद्यालय के अन्तर्गत कृषि महाविद्यालय के मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायन शास्त्र विभाग में 18 सितम्बर से 08 अक्टूबर, 2018 तक सेन्टर आफ एडवांस फेकल्टी टेऊनिंग के अंतर्गत ’’कृषकों की आय को दोगुना करने के लिए मृदा स्वास्थ्य के टिकाऊ प्रबंधन हेतु नये आयाम’’ विषय पर 21 दिवसीय प्रशिक्षण का समापन हुआ। इसमें 11 राज्यों के कृषि वैज्ञानिकों ने भाग लिया।
21 दिवसीय कृषि वैज्ञानिकों का राष्ट्रीय प्रािक्षण का समापन
समापन अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. पी.के. मिश्रा, अधिष्ठाता कृषि संकाय ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आज विश्वस्तर पर श्समगतिशील खेती हेतु मृदा का स्वस्थ बनाए रखने के साथ ही मृदा स्वास्थ्य का संरक्षण संवर्धनश् अति महत्वपूर्ण है। डॉ. धीरेन्द्र खरे, संचालक अनुसंधान सेवाऐं ने 21 दिवसीय महत्वपूर्ण टेऊनिंग के दौरान बाहर से आये वैज्ञानिकों को बधाई दी एवं प्राकृतिक व जलवायु परिवर्तन के साथ ही मृदा के स्वास्थ्य पर ध्यान रखते हुये कृषि उत्पादन दुगना करना कृषि वैज्ञानिकों की जिम्मेदारी है एवं संचालक शिक्षण डॉ. एस.डी. उपाध्याय ने कृषि वैज्ञानिकों को नई तकनीक व जानकारी को अपने-अपने राज्यों में कृषि को एवं शिक्षा में उपयोग करने पर जोर दिया इस दौरान डॉ. आर. एम. साहू, अधिष्ठाता कृषि महाविद्यालय, डॉ. आर.के. नेमा, कृषि अभियांत्रिकी महाविद्यालय एवं विभागाध्यक्ष कीटशास्त्र विभाग डॉ. ए.के. भौमिक उपस्थित थे।
21 दिवसीय प्रशिक्षण की पूर्ण जानकारी सी.ए.एफ.टी. संचालक एंव मृदा विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. बी.एल. शर्मा द्वारा दी गई। कार्यक्रम का कुशल संचालन वैज्ञानिक डॉ. शेखर सिंह बघेल एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. ए.के. द्विवेदी द्वारा किया गया।
डॉ. बी.एल. शर्मा सी.ए.एफ.टी संचालक द्वारा बताया गया कि मृदा विज्ञान विभाग में इस प्रकार का प्रशिक्षण लगातार विगत 23 वर्षो से प्रति वर्ष होता आ रहा है एवं यह 33वाँ प्रशिक्षण था जिसमें विभिन्न विषयों के 11 राज्यों, आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु, पंजाब, बिहार, उत्तर प्रदेश, असम, महाराष्ट्र, गुजरात, नागालैण्ड, छत्तीसगढ़ एवं मध्यप्रदेश के प्रशिक्षणार्थियों ने भाग लिया। इस दौरान सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक व्याख्यान दिये गये प्रशिक्षण के दौरान भारत के विभिन्न कृषि वि.वि. एवं संस्थाओ के ख्यातिलब्ध वैज्ञानिको द्वारा कृषि कार्य हेतु भूमि में उपयोगी सूक्ष्म जीवों की महत्ता, जैविक खेती, संतुलित खाद का प्रयोग, प्राकृतिक संसाधनो का टिकाऊ उपयोग एवं सूक्ष्म पोषक तत्व मृदा का सही व संतुलित उपयोग विषयों पर व्याख्यान दिये गये एवं शैक्षणिक भ्रमण के दौरान जबलपुर की जैव विविधता को जानने हेतु भेडाघाट, बरगी डेम, राष्ट्रीय खरपतवार अनुसंधान केन्द्र, औषधीय उधान, जैव उर्वरक उत्पादन केन्द्र, जैव प्रौधोगिकी केन्द्र एवं अन्य प्राकृतिक स्थानों का भ्रमण कराया गया।
इस 21 दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान डॉ. मृणाल चौधरी, असम एवं डॉ. डी. इलयराज, तमिलनाडु ने अनुभव साझा किये। साथ ही एक परीक्षा का आयोजित किया गया जिसमें क्रमशः राजन भट्ट, पंजाब (प्रथम), राजेश कुमार, फैजाबाद (द्वितीय) एवं डॉ. मोहना राव पुली, आंध्रप्रदेश (तृतीय) को पुरूस्कार अध्यक्ष डॉ. पी.के. मिश्रा द्वारा प्रदान किये गये।
समापन के दौरान ट्रेनिंग के कम्पेडियम तथा प्रेक्टिकल मेनुअल का विमोंचन एवं सभी प्रशिक्षार्थियों को प्रमाण पत्र प्रदान किये गये। प्रशिक्षण कार्यक्रम में विभाग के डॉ. ए.के. द्विवेदी, डॉ. एन.जी. मित्रा, डॉ. पी.एस. कुल्हाऱे, डॉ. एच.के. राय, डॉ. जी. एस. टैगोर, डॉ. बी.एस. द्विवेदी, डॉ. ए.के. उपाध्याय, डॉ. आर.के. साहू, श्री एफ.सी. अमूले, श्री अभिषेक शर्मा, डॉ. अर्पित सूर्यवंशी एवं श्री राजकुमार काछी आदि का सक्रिय योगदान रहा।
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