कान्हा से बांधवगढ़-सतपुड़ा तक गूंजी बारहसिंगा की दहाड़: MP में 66 से बढ़कर 1400 हुए ‘हार्ड ग्राउंड’ बारहसिंगा; जानें कैसे मिली सफलता

कान्हा से बांधवगढ़-सतपुड़ा तक गूंजी बारहसिंगा की दहाड़: MP में 66 से बढ़कर 1400 हुए 'हार्ड ग्राउंड' बारहसिंगा; जानें कैसे मिली सफलता

कान्हा से बांधवगढ़-सतपुड़ा तक गूंजी बारहसिंगा की दहाड़: MP में 66 से बढ़कर 1400 हुए ‘हार्ड ग्राउंड’ बारहसिंगा; जानें कैसे मिली सफलता

भोपाल: मध्य प्रदेश के राजकीय पशु बारहसिंगा के संरक्षण और संवर्धन के क्षेत्र में वन्यजीव प्रेमियों और वन विभाग के लिए बेहद उत्साहजनक खबर आई है। प्रदेश में अब बारहसिंगा की कुल संख्या बढ़कर 1,400 हो गई है। कभी विलुप्त होने की कगार पर पहुँच चुकी इस दुर्लभ प्रजाति को बचाने के लिए राज्य में चलाए गए पुनर्वास अभियान पूरी तरह सफल साबित हुए हैं। कान्हा से बांधवगढ़-सतपुड़ा तक गूंजी बारहसिंगा की दहाड़: MP में 66 से बढ़कर 1400 हुए ‘हार्ड ग्राउंड’ बारहसिंगा; जानें कैसे मिली सफलता

66 से 1,400 तक का अद्भुत सफर इतिहास पर नज़र डालें तो वर्ष 1964 में कान्हा नेशनल पार्क में केवल 66 ‘हार्ड ग्राउंड’ प्रजाति के बारहसिंगा ही बचे थे। वर्षों के सघन संरक्षण के बाद वर्ष 2010 के आसपास इनकी संख्या 250 तक पहुँची और अब केवल कान्हा टाइगर रिजर्व में इनकी संख्या बढ़कर करीब 1,000 हो गई है। कभी यह प्रजाति छत्तीसगढ़ के रायपुर-जगदलपुर, गुजरात के अहमदाबाद और महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिलों तक फैली हुई थी।

सतपुड़ा और वन विहार में सफल रहा शिफ्टिंग मॉडल बारहसिंगा को किसी एक ही जंगल में सीमित रखकर महामारी या अन्य खतरों से बचाने के लिए वन विभाग ने इन्हें अन्य संरक्षित क्षेत्रों में बसाने का फैसला किया।

  • सबसे पहले कान्हा से बारहसिंगा लाकर भोपाल के वन विहार में बसाया गया, जहाँ यह प्रयोग सफल रहा।

  • इसके बाद वर्ष 2015 से 2023 के बीच सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (बोरी) में एंक्लोजर बनाकर 115 बारहसिंगा शिफ्ट किए गए। आज सतपुड़ा में इनकी संख्या बढ़कर 300 हो चुकी है।

  • इसके अलावा बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में भी पुनर्वास अभियान बेहद सफल रहा है।