कांग्रेस भरवा रही शपथ पत्र, नहीं लड़ेंगे बागी होकर चुनाव

राजनीतिक डेस्क। विधानसभा चुनाव 2018 के लिए कांग्रेस ने जिताऊ नेता की तलाश में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) की छानबीन समिति को दूसरी बार भोपाल बुलवाकर दावेदारों व सांसद-विधायकों से मिलवाया। इस दौरान समिति ने दावेदारों से शपथ-पत्र में वचन भी लिया है कि अगर दूसरे व्यक्ति को टिकट दिया गया, तो वे बागी नहीं होंगे।

न निर्दलीय, न अन्य दल से कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी के विरुद्ध चुनाव लड़ेंगे। छानबीन समिति की शताधिक नेताओं की वन-टू-वन चर्चा हुई, जिसमें नेताओं ने जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) और ओबीसी का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठनों के साथ बातचीत और गठबंधन के सुझाव दिए हैं।

शनिवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में समिति से मिलने पहुंचे दावेदारों की संख्या ज्यादा हो जाने से हंगामा भी हुआ, जिससे वन-टूवन के बजाय सामूहिक मुलाकात हुई। शाम को दावेदारों की भीड़ के कारण मुलाकात में पक्षपात के आरोप लगाते हुए लोगों ने हंगामा किया, तो समिति चेयरमैन मधुसूदन मिस्त्री ने बाहर आकर शांत किया और फिर समूह चर्चा की।

विधानसभा चुनाव के लिए एआईसीसी ने मिस्त्री की अध्यक्षता में छानबीन समिति बनाई है, जिसमें नेटा डिसूजा और अजय कुमार लल्लू सदस्य हैं। तीन सदस्य जुलाई के बाद शुक्रवार को फिर भोपाल पहुंचे। दो दिन में छानबीन समिति ने चुनाव समिति, सांसद, विधायकों के अलावा करीब 300 टिकटार्थियों से भी मुलाकात की।

दूसरे दिन समिति की राज्यसभा सदस्य राजमणि पटेल, विधायक कमलेश्वर पटेल, उमंग सिंगार, झूमा सोलंकी, मनोज अग्रवाल, सौरभ सिंह, रामपाल सिंह, पूर्व सांसद विजयलक्ष्मी साधौ सहित कई दावेदारों से मुलाकात हुई।

जयस-ओबीसी पर चिंता व सुझाव : आदिवासी युवाओं के सक्रिय संगठन ‘जयस’ को लेकर पार्टी के आदिवासी नेताओं ने चिंता जताई। विधायकों ने भी इस मुद्दे पर छानबीन समिति से चर्चा की। आदिवासी नेताओं ने जयस की सक्रियता और उनके बीच के कुछ जनाधार वाले नेताओं से पार्टी स्तर पर बातचीत का सुझाव दिया, जिससे कांग्रेस को उनके वोट का फायदा मिले।

सूत्र बताते हैं कि पिछड़े वर्ग के नेताओं ने 90 सीटों पर प्रभाव का तथ्य सामने रखा और वर्ग को कम से कम 75 सीटों पर उनके जिताऊ नेताओं को खड़ा करने का सुझाव दिया।

सामाजिक-जातीय समीकरण :छानबीन समिति ने दावेदारों से विधानसभा सीट के सामाजिक और जातीय समीकरणों की जानकारी सवालों में पूछी है। समिति ने हारने वाली विधानसभा सीट पर पार्टी की हार के कारणों के बारे में भी पूछा है तो जीती हुई सीटों पर मौजूदा स्थिति का पता लगाने की कोशिश की।

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