कांग्रेस के बैतूल-शहडोल प्रत्याशियों का विरोध
भोपाल । मध्यप्रदेश में कांग्रेस के बैतूल और शहडोल लोकसभा चुनाव के घोषित प्रत्याशियों का विरोध खुलकर सामने आने लगा है। आदिवासी विकास परिषद के भोपाल में हुए कार्यक्रम में टिकट नहीं मिलने पर नाराज दावेदारों ने मुख्यमंत्री कमलनाथ से लेकर सांसद कांतिलाल भूरिया तक के समक्ष आपत्ति जताई। बैतूल में गौंड और इसी समाज के दूसरे हिस्से प्रधान में दरार खिंचने लगी है तो शहडोल में भाजपा से आई महिला नेता को टिकट देने का कांग्रेस की महिला दावेदारों ने विरोध किया है। अगले एक-दो दिन में मंडला, खरगोन व धार सीटों का फैसला होना है।
लिहाजा वहां के दावेदार अपना दावा अंतिम रूप से पेश करने के लिए दिल्ली पहुंच गए हैं। कांग्रेस ने पिछले दिनों भोपाल, मंदसौर, होशंगाबाद, टीकमगढ़, खजुराहो और बालाघाट सहित अनुसूचित जनजाति की आरक्षित रतलाम, बैतूल और शहडोल सीटों पर प्रत्याशी घोषित किए थे। अनुसूचित जनजाति आरक्षित सीटों में से रतलाम सीट पर मौजूदा सांसद कांतिलाल भूरिया ने उन्हें नुकसान की स्थिति में ला सकने वाले नेता जेवियर मेड़ा को मना लिया है।
मेड़ा के अलावा भूरिया का विरोध करने की स्थिति में वहां कोई दूसरा बड़ा नाम नहीं है। पहुंचा सकते हैं नुकसान बैतूल लोकसभा सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी रामू टेकाम को गौंड समाज के ही लोगों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। गौंड समाज में एक गौंड होते हैं और दूसरे प्रधान। टेकाम प्रधान से आते हैं। सूत्र बताते हैं कि गौंड और प्रधान के बीच बैतूल में दरार खिंच गई है। गौंड दावेदार एक होने की रणनीति बना रहे हैं। ये लोग टिकट नहीं बदले जाने पर अपने में से किसी एक को चुनाव मैदान में उतारकर कांग्रेस को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
मंडला प्रत्याशी में तन्खा की भूमिका अहम
अनुसूचित जनजाति की आरक्षित मंडला, खरगोन सीटों पर भी कशमकश की स्थिति है। मंडला लोकसभा सीट पर प्रत्याशी तय करने में राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा की प्रमुख भूमिका रहेगी। विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति की विधानसभा सीट भी इसी लोस का हिस्सा होने से उनकी राय भी अहम होगी। अभी यहां भूपेंद्र वरकड़े और मीना शाह के नाम चल रहे हैं, जिनमें से वरकड़े गोंडवाना स्टूडेंट यूनियन में सक्रिय रहे हैं। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने विस चुनाव में इस लोस क्षेत्र से एक लाख 94 हजार वोट लिए थे। सूत्र बताते हैं कि वरकड़े का नाम तन्खा ने बढ़ाया है। वहीं, खरगोन को लेकर गृह मंत्री बाला बच्चन की पत्नी प्रवीणा के साथ डॉ. गोविंद मुजाल्दे, रक्षा मुजाल्दे व सिलदार पटेल का नाम चर्चा में है। हालांकि मंत्री बच्चन की पत्नी का नाम सबसे आगे ह
डॉक्टर, पूर्व जज भी दावेदार
मालूम हो, वहां गौंड दावेदारों में डॉ. पद्माकर हैं, जिनकी पत्नी भी डॉक्टर हैं और उनका परिवार लंबे समय से कांग्रेस से जुड़ा है। एक अन्य दावेदार डॉ. शीलू चिमूरकर भी पेशे से डॉक्टर हैं। ये दोनों ही दावेदार क्षेत्र में समाजसेवा भी करते हैं। एक पूर्व जज सावित्री कुमरे की दावेदारी भी है। ये सभी गौंड हैं और आदिवासी विकास परिषद के भोपाल में हुए कार्यक्रम में इन लोगों ने नेताओं से न केवल अपनी दावेदारी की बात रखी, बल्कि टेकाम के भोपाल में रहने से क्षेत्र में संपर्क नहीं होने की बात भी बताई।
बाहरी को प्रत्याशी बनाने पर जाहिर हो रही नाराजगी
शहडोल लोकसभा क्षेत्र में कांग्रेस में अनुसूचित जनजाति की महिला नेताओं ने प्रत्याशी का विरोध शुरू किया है। भाजपा से पूर्व विधायक रहीं प्रमिला सिंह को प्रत्याशी बनाए जाने से नाराज कांग्रेस नेताओं में दिव्या सिंह, सुनीता परस्ते, कृष्णा उरेती और सावित्री धूमकेतू प्रमुख हैं। दिव्या सिंह ने आदिवासी विकास परिषद के कार्यक्रम में भूरिया और अन्य नेताओं के सामने अपना पक्ष रखा था। वहीं गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से कांग्रेस में आईं सुनीता परस्ते भी इसको लेकर अपनी नाराजगी नेताओं तक पहुंचा चुकी हैं। जिला पंचायत में चार से पांच बार जनप्रतिनिधि रहने वाली कांग्रेस की पुरानी नेता कृष्णा व सावित्री भी प्रमिला सिंह को प्रत्याशी बनाए जाने से असंतुष्ट हैं।

