Thursday, April 30, 2026
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कांग्रेस और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के बीच समझौते के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका, अदालत ने जताई हैरानी

कांग्रेस पार्टी और चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना के बीच बीजिंग में सात अगस्त 2008 को हुए समझौते को लेकर दायर याचिका पर उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को सुनवाई करने से इनकार कर दिया। अदालत ने याचिकाकर्ता को पहले उच्च न्यायालय जाने को कहा। याचिका में इस मामले की जांच सीबीआई और एनआईए द्वारा कराए जाने की मांग की गई थी।

मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिकाकर्ता को पहले उच्च न्यायालय जाने को कहा। इस दौरान अदालत ने डील पर हैरानी जताते हुए कहा, ‘किसी विदेशी सरकार द्वारा किसी राजनीतिक दल के साथ समझौते पर हस्ताक्षर करने के बारे में कभी नहीं सुना।’

अदालत में दिल्ली के वकील शशांक शेखर झा और गोवा से संचालित ऑनलाइन न्यूज पोर्टल गोवा क्रोनिकल के संपादक सेवियो रोदरिग्यूज ने यह याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि यह एमओयू राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा करता है और यूएपीए कानून के तहत एनआईए या सीबीआई को इसकी जांच करनी चाहिए।

याचिका में दावा किया गया है कि यह समझौता तब हुआ था जब 2008 में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार सत्ता में थी। दावा किया गया है कि इस समझौते में उच्च-स्तरीय जानकारी, सहयोग का आदान-प्रदान किया गया है। इसमें कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी, कांग्रेस पार्टी और केंद्र सरकार को प्रतिवादी बनाया गया।

याचिका में दावा किया गया है कि दोनों पक्षों को ‘महत्वपूर्ण द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय विकास पर एक-दूसरे से परामर्श करने का अवसर’ प्रदान करने का समझौता भी हुआ है। कांग्रेस की तरफ से राहुल गांधी ने सोनिया गांधी की उपस्थिति में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। उस समय शी जिनपिंग चीन के उपराष्ट्रपति थे।

 

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम