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कश्मीर में घूमे, कार्यकर्ताओं संग बैठकें की, इन विपक्षी नेताओं को छुआ तक नहीं, जानें क्यों?

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वेब डेस्क। कश्मीर घाटी में बड़े सियासी नेताओं पर बंदिशों के आरोपों के बीच नेशनल कांफ्रेंस (NC) के दो सांसद एक सप्‍ताह तक घाटी में न केवल सक्रिय रहे बल्कि कई जगह पर कार्यकर्ताओं से मिले और बैठकें भी कीं। इतना ही नहीं दोनों नेताओं ने कश्‍मीर को लेकर केंद्र सरकार पर आरोप भी जड़े, इसके बावजूद दोनों नेता लोगों से मिलते रहे। न सुरक्षा बलों और न ही स्‍थानीय पुलिस ने उन्‍हें रोका। दोनों अब वापस दिल्‍ली लौट गए हैं। दोनों की सक्रियता और पुलिस द्वारा उन्‍हें खुली छूट से यहां के सियासी पंडित भी हैरान हैं। अपेक्षा की जा रही थी कि दोनों को श्रीनगर पहुंचते ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

साफ है कि केंद्र सरकार जम्‍मू कश्‍मीर में राजनीतिक प्रक्रिया को जल्‍द पटरी पर लाना चाहती है। बताया जा रहा है कि इस प्रक्रिया के तहत कुछ सियासी दलों के दिग्‍गज नेताओं व सिविल सोसाइटी से भी संवाद किया गया है। इसी प्रक्रिया के तहत सिविल सोसाइटी व कुछ मजहबी नेताओं को हिरासत से रिहा भी किया गया है। कर्फ्यू में ढील के बाद से घाटी में हालात तेजी से सामान्य हो रहे हैं। अनुच्छेद 370 हटाए जाने और राज्य के दो हिस्सों में बांटे जाने के बाद से राज्य में कोई बड़ी अप्रिय घटना नहीं हुई है। घाटी से एक बार फिर कश्मीरियत की खुशबू आने लगी है, जो आतंकी घटनाओं के बीच कहीं दब गई थी।

नजरबंद हैं ये बड़े नेता

यहां बता दें कि जम्मू कश्मीर राज्‍य के पुनर्गठन से पूर्व वादी में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए नेशनल कांफ्रेंस, पीडीपी, माकपा, पीपुल्स कांफ्रेंस समेत सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं, कार्यकर्ताओं को एहतियातन हिरासत में लिया गया या उन्हें उनके घरों में नजरबंद कर दिया गया। नेशनल कांफ्रेंस अध्‍यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला अपने घर में नजरबंद हैं, जबकि उमर अब्दुल्ला को हरि निवास में एहतियातन हिरासत में रखा गया है। पूर्व मुख्‍यमंत्री और पीडीपी की अध्‍यक्ष महबूबा मुफ्ती को चश्‍माशाही में हिरासत में रखा गया है। आइएएस से नेता बने शाह फेसल को दिल्‍ली एयरपोर्ट पर उस समय हिरासत में ले लिया गया था, जब वह तुर्की जाने का प्रयास कर रहे थे। बाद में उन्‍हें श्रीनगर में भेज दिया गया। तब से वह हिरासत में हैं।

राष्ट्रविरोधी नारेबाजी कर चुके हैं लोन

इन गिरफ्तारियों के बीच नेशनल कांफ्रेंस के दो वरिष्ठ नेताओं मोहम्मद अकबर लोन और जस्टिस (रिटायर्ड) हसनैन मसूदी को किसी ने नहीं छुआ। अकबर लोन वह नेता हैं, जिनका चुनावों के दौरान पाकिस्‍तान के समर्थन में वीडियो वायरल हुआ था और राज्य विधानसभा में भी राष्‍ट्रविरोधी नारेबाजी कर चुके हैं। इतना ही नहीं संसद सत्र में भी दोनों सांसद सक्रिय रहे और जम्मू कश्मीर पुनर्गठन विधेयक पर चर्चा में भी हिस्सा लिया था। उसके बाद दोनों पिछले सप्‍ताह कश्‍मीर आए। दोनों ने यहां श्रीनगर में नेशनल कांफ्रेंस मुख्यालय में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ एक बैठक करने के अलावा सिविल सोसाइटी के कुछ वरिष्ठ सदस्यों से भी ताजा हालात पर चर्चा की थी। इसके बाद दोनों नेताओं ने कश्मीर के ताजा घटनाक्रम को विस्फोटक करार दिया था और चेताया था कि अगर सरकार प्रशासनिक पाबंदियां हटाएगी तो यहां लोग सड़कों पर आ जाएंगे।

संवाद प्रक्रिया का हिस्‍सा हैं कई बड़े नेता

दोनों की भड़काऊ बयानबाजी के बाद माना जा रहा था कि पुलिस इन्हें भी तुरंत हिरासत में लेगी। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ और दोनों सांसद स्‍थानीय लोगों से मुलाकात करने के बाद दिल्ली लौट गए। पुलिस और प्रशासन के इस कदम से सभी हैरान हैं। अलबत्ता, संबधित सूत्रों ने बताया कि यह दोनों सांसद और कुछ अन्‍य नेता इस समय जम्मू-कश्मीर में हालात समान्य बनाने की केंद्र सरकार द्वारा की जा रही कवायद से जुड़े हैं। इनके जरिए केंद्र न सिर्फ नेशनल कांफ्रेंस के साथ बल्कि कुछ अन्य राजनीतिक व सामाजिक संगठनों के साथ भी लगातार संवाद की प्रक्रिया बहाल करने में जुटा है। इनके आग्रह पर ही प्रशासन ने कथित तौर पर व्यापारिक संगठनों से जुड़े दो नेताओं को रिहा करने के अलावा एक मजहबी नेता को भी छोड़ा है।

 

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