कलाई या हाथ में पहनते हैं रुद्राक्ष? भूलकर भी न करें ये गलतियां, जानें जरूरी नियम व सावधानियां

कलाई या हाथ में पहनते हैं रुद्राक्ष? भूलकर भी न करें ये गलतियां, जानें जरूरी नियम व सावधानियां

धर्म-अध्यात्म डेस्क (यश भारत): हिंदू धर्म में रुद्राक्ष को अत्यंत पवित्र और पूजनीय माना गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के अश्रुओं (आंसुओं) से हुई है, इसीलिए इसे साक्षात शिव का प्रसाद और स्वरूप माना जाता है। सनातन परंपरा में शिव भक्त इसे माला या आभूषण के रूप में गले और कलाई में धारण करते हैं।

मान्यता है कि हाथ या कलाई में रुद्राक्ष धारण करने से भगवान भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त होती है, मन शांत रहता है और व्यक्ति नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षित रहता है। हालांकि, ज्योतिष शास्त्र और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कलाई पर रुद्राक्ष धारण करने के कुछ सख्त नियम हैं, जिनका पालन न करने पर इसका शुभ फल प्राप्त नहीं होता।

रुद्राक्ष धारण करने के मुख्य नियम

पहली बार रुद्राक्ष पहनते समय करें यह काम

  1. पहली बार धारण करने के लिए सोमवार का दिन चुनें।

  2. रुद्राक्ष को धारण करने से पहले गंगाजल और पंचामृत से स्नान कराकर शुद्ध करें।

  3. इसके बाद भगवान शिव का ध्यान करते हुए ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का कम से कम 108 बार जाप कर इसे अभिमंत्रित करें और फिर कलाई में धारण करें। कलाई या हाथ में पहनते हैं रुद्राक्ष? भूलकर भी न करें ये गलतियां, जानें जरूरी नियम व सावधानियां

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