कंप्यूटर ऑपरेटर को वेतन के लाले, ठेकेदार पर होगी एफ आई आर

जबलपुर। निगम में कार्यरत कम्प्यूटर ऑपरेटरों को लगभग चार माह से वेतन नहीं मिला है। कम्प्यूटर ऑपरेटर का ठेकेदार अपने अधीनस्थ कर्मचारियों से दो हजार रूपयों की मांग कर रहा है जिस कारण ये कर्मचारी ठेकेदार द्वारा किये जा रहे शोषण का शिकार बन रहे है। आलम ये है कि इन कर्मचारियों को अपना पारिश्रमिक मांगने दर.दर गुहार लगानी पड़ रही है। गौरतलब है कि नगर निगम में कम्प्यूटर ऑपरेटरों की नियुक्ति के लिये राज सिक्योरिटी फोर्स को ठेका दिया गया था नगर निगम में इन कर्मचारियों द्वारा कम्प्यूटर की सेवाएं लगातार दी जा रही है बावजूद इसके चार माह से सेलरी ना होने से इन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
किसी की भी नहीं सुन रहा ठेकेदार
विगत माहों से ये ऑपरेटर कई बार लिखित में अपनी षिकायत निगमायुक्त को सौंप चुके है। निगम अधिकारियों ने इनकी इस परेषानियों का संज्ञान लेकर ठेकेदार को भुगतान देने मौखिक आदेष भी दिया। वही ठेकेदार इन कमज़्चारियों को षिकायत करने का दण्ड भुगतने धमका रहा है।
त्योहार सिर पर हाथों में मायूसी
जहां एक ओर सरकारी कर्मचारियों को दीवाली दशहरा का बोनस दिया जा रहा है वही बेरोजगारी का दंष झेल रहे ये कम्प्यूटर ऑपरेटर इस आस में निगम में अपनी सेवाएं दे रहे है कि कम से कम बेरोजगारी से ठेकेदार के अधीनस्थ काम करना बेहतर है। ये वतज़्मान व्यवस्था की मजबूरी ही है कि सिर पर त्योहार होने के बाद भी ये कौडिय़ों मोहताज हो रहे है।
सेलरी जून की मांग सितम्बर में
ठेकेदार की तानाशाही और ऑपरेटरों की प्रताडऩा का अंदाजा इसी बात से लगाया जाता है कि तन्ख्वाह की जून माह का पारिश्रमिक के भुगतान का आवेदन सितम्बर माह के 28 अक्टूबर को दिया जा रहा है
निगमायुुक्त ने बढ़वाया था ऑपरेटरों का पारिश्रमिक
इन ऑपरेटरों को पहले मात्र पांच हजार रुपए दिया जा रहा थाए कमज़्चारियों ने जब निगमायुक्त से इस बारे मे जानकारी दी तो उनके द्वारा इन ऑपरेटरों को कलेक्टर द्वारा तय पारिश्रमिक के आधार पर भुगतान नौ हजार रूपए कर दिया गया था लेकिन आज तक ठेकेदार ने इन्हें ना तो तय भुगतान को स्वीकारा और ना ही इन्हें पूवज़् का भुगतान दिया गया।
लगभग दो सौ ऑपरेटर है यहां
निगम द्वारा कम्प्यूटर ऑपरेटरों की आवष्यकता के आधार पर ठेका राज सिक्योरिटी फोसज़् को दिया गया था। जिसके लगभग दो सौ कमज़्चारी निगम में कायज़् कर रहे है। चाहे संबल योजना हो या फिर स्वच्छता अभियान इन सभी ऑपरेटरों ने सफल बनाने दिन रात मेहनत की है लेकिन इस मेहनत के एवज् मे इन्हें अब परेषानियां झेलनी पड़ रही है।

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